
सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी, काम में आंशिकता या योजनाओं में धांधली जैसी शिकायतें आम हैं। लेकिन अब चिंता न करें! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय (पीएमओ) ने ऐसी व्यवस्था बनाई है, जहां आपकी आवाज सीधे शीर्ष स्तर तक पहुंचती है और कार्रवाई होती है। चाहे भ्रष्टाचार हो या सरकारी योजना का लाभ न मिलना, पीएमओ के तीन पक्के तरीकों से शिकायत दर्ज करें। यह रिपोर्ट विस्तार से बताती है कि कैसे आपकी बात प्रधानमंत्री तक पहुंचेगी।
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ऑनलाइन पोर्टल से तेज शिकायत
पीएमओ की आधिकारिक वेबसाइट pmindia.gov.in/hi पर जाएं। होमपेज पर नीचे स्क्रॉल करें, जहां ‘प्रधानमंत्री को लिखें’ का विकल्प दिखेगा। ‘Click here to Sign Up’ पर क्लिक कर नाम, मोबाइल, ईमेल और पासवर्ड भरें। लॉगिन के बाद नई शिकायत फॉर्म खुल जाएगा। यहां समस्या विस्तार से लिखें- जैसे, “ग्राम पंचायत ने मनरेगा मजदूरी नहीं दी”। दस्तावेज (फोटो, बिल) अपलोड करें और सबमिट करें।
तुरंत रजिस्ट्रेशन नंबर मिलेगा, जिससे pgportal.gov.in पर स्टेटस ट्रैक करें। यह CPGRAMS सिस्टम से जुड़ा है, जो संबंधित विभाग को सूचित करता है। लाखों शिकायतें इसी से निपट चुकी हैं, और PMO मॉनिटरिंग करता है।
डाक या फैक्स से ऑफलाइन सबमिशन
अगर इंटरनेट न हो, तो पत्र लिखें। पुराना पता था साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011, लेकिन हालिया अपडेट के मुताबिक ‘सेवा तीर्थ’ अब आधिकारिक डाक पता है। स्पीड पोस्ट से भेजें- नाम, पता, मोबाइल, समस्या का विवरण और सबूत संलग्न करें। फैक्स के लिए 011-23016857 नंबर यूज करें। पत्र पहुंचने पर पीएमओ उसे डिजिटल कर रजिस्टर करता है। यह तरीका ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आदर्श है, जहां डिजिटल पहुंच कम है। उदाहरणस्वरूप, उत्तर प्रदेश के एक किसान ने इसी से सिंचाई योजना की शिकायत की, और 15 दिनों में अधिकारी जांच पहुंचे।
सोशल मीडिया और ईमेल का दम
आधुनिक युग में @PMOIndia या @narendramodi को ट्विटर/एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर टैग करें। #PMOComplaint या #ModiSeBaat लिखकर पोस्ट शेयर करें, वीडियो/फोटो जोड़ें। connect@mygov.nic.in पर ईमेल भी भेजें। पीएमओ की टीम सोशल मीडिया मॉनिटर करती है- वायरल होने पर तेज एक्शन मिलता है। हेल्पलाइन 011-23386447 पर कॉल करें। हाल के मामलों में, दिल्ली के एक निवासी ने इंस्टाग्राम रील से बिजली बिल त्रुटि की शिकायत की, जो 48 घंटों में ठीक हो गई।
क्यों है पीएमओ व्यवस्था प्रभावी?
पीएमओ न सिर्फ सुनता है, बल्कि ट्रैकिंग और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करता है। 2025 तक करोड़ों शिकायतें निपटाई जा चुकीं, जिसमें 70% पर संतोषजनक समाधान हुआ। भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी कैटेगरी चुनें। सुझाव: शिकायत स्पष्ट, तथ्यात्मक रखें; फर्जी मामले पर जुर्माना हो सकता है।
















