
देश में आगामी जनगणना (Census 2026-27) को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन इसी बीच जालसाजों ने भी अपना ‘ठगी का जाल’ बिछाना शुरू कर दिया है, गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी कर लोगों को फर्जी ‘एन्युमरेटर’ (गणक) से सावधान रहने की सलाह दी है।
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जालसाज ऐसे बना रहे हैं निशाना (Modus Operandi)
जालसाज अक्सर दो तरीकों से ठगी कर रहे हैं:
- घर आकर: फर्जी आईडी कार्ड दिखाकर खुद को सरकारी कर्मचारी बताते हैं और जनगणना के फॉर्म भरने के बहाने आधार, पैन और बैंक डिटेल्स मांगते हैं।
- डिजिटल फ्रॉड: व्हाट्सएप या SMS के जरिए एक लिंक भेजते हैं और कहते हैं कि ‘घर बैठे अपनी जानकारी अपडेट करें’। लिंक पर क्लिक करते ही फोन हैक हो जाता है या ओटीपी (OTP) मांगकर खाते से पैसे उड़ा लिए जाते हैं।
कैसे पहचानें असली और नकली का अंतर?
- दस्तावेजों की मांग: असली अधिकारी आपसे जानकारी जरूर पूछेंगे, लेकिन वे कभी भी आपके आधार कार्ड की फोटोकॉपी, बैंक खाते का नंबर, एटीएम पिन या ओटीपी की मांग नहीं करेंगे।
- रजिस्ट्रेशन फीस: जनगणना एक अनिवार्य सरकारी प्रक्रिया है, यदि कोई इसके नाम पर ‘रजिस्ट्रेशन फीस’ या पैसे की मांग करता है, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।
- डिजिटल पहचान: आधिकारिक प्रगणकों (Enumerators) के पास सरकार द्वारा जारी 11 अंकों का यूनिक आईडी नंबर और वैध पहचान पत्र होता है। बिना आईडी देखे किसी को घर में प्रवेश न दें।
सुरक्षा के कड़े मंत्र
- सेल्फ-एन्युमरेशन का विकल्प: सरकार ने इस बार स्वयं गणना (Self-Enumeration) की सुविधा दी है, आप se.census.gov.in पर जाकर खुद जानकारी भर सकते हैं। इसके बाद आपको एक आईडी मिलेगी, जिसे मांगे जाने पर आप आने वाले अधिकारी को दिखा सकते हैं।
- संदेह होने पर क्या करें: यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति घर आए, तो उससे उसका पहचान पत्र मांगें और पास के वार्ड ऑफिस या पुलिस स्टेशन से इसकी पुष्टि करें।
किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही किसी अजनबी को अपनी निजी वित्तीय जानकारी दें, यदि आप ठगी का शिकार होते हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
















