
देश के करोड़ों बचत खाताधारकों के लिए केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) की ओर से बड़ी खुशखबरी आई है, अब आपको अपने बैंक खाते में एक निश्चित राशि बनाए रखने की चिंता नहीं सताएगी, छह प्रमुख सरकारी बैंकों ने अपने नियमों में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए ‘मिनिमम बैलेंस’ (Minimum Balance) न रखने पर लगने वाले जुर्माने को पूरी तरह खत्म करने का निर्णय लिया है।
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आम आदमी की जेब पर नहीं पड़ेगा बोझ
अक्सर देखा जाता था कि बैंक खाते में न्यूनतम राशि से कम बैलेंस होने पर बैंक जुर्माने के तौर पर पैसे काट लेते थे। कई बार तो गरीब और मध्यम वर्ग के ग्राहकों का बैलेंस माइनस में भी चला जाता था। लेकिन अब पंजाब नेशनल बैंक (PNB), केनरा बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बड़े नामों ने इस प्रथा को बंद कर दिया है।
इन 6 सरकारी बैंकों ने बदला नियम
- भारतीय स्टेट बैंक (SBI): देश के सबसे बड़े बैंक ने पहले ही सभी बचत खातों पर मिनिमम बैलेंस की अनिवार्यता खत्म कर दी थी।
- पंजाब नेशनल बैंक (PNB): PNB ने जुलाई 2025 से औसत मासिक शेष (AMB) न रखने पर लगने वाले सभी शुल्कों को शून्य कर दिया है।
- बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB): बैंक ने ग्राहकों को राहत देते हुए जुर्माने की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है।
- केनरा बैंक: केनरा बैंक ने हाल ही में घोषणा की है कि वह सभी प्रकार के बचत खातों से इस पेनाल्टी को हटा रहा है।
- इंडियन बैंक: इंडियन बैंक ने भी छोटे जमाकर्ताओं को ध्यान में रखते हुए इस शुल्क को हटाने का फैसला किया है।
- बैंक ऑफ इंडिया (BoI): बैंक ऑफ इंडिया ने भी अपने नियमों में संशोधन कर ग्राहकों को बड़ी वित्तीय राहत दी है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, बैंकों का यह कदम ‘वित्तीय समावेशन’ (Financial Inclusion) को बढ़ावा देने के लिए है, सरकार चाहती है कि समाज का आखिरी व्यक्ति भी बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े और उसे जुर्माने का डर न रहे, वर्तमान में देश में लगभग 72 करोड़ ऐसे खाते हैं, जिनमें मिनिमम बैलेंस की जरूरत नहीं होती, जिनमें ‘जन धन खाते’ सबसे प्रमुख हैं।
प्राइवेट बैंक अब भी सख्त
एक ओर जहाँ सरकारी बैंक आम जनता को राहत दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई निजी क्षेत्र (Private Banks) के बैंकों ने न्यूनतम बैलेंस की सीमा को और बढ़ा दिया है, कुछ निजी बैंकों में तो यह सीमा 25,000 रुपये तक पहुँच गई है, जिसका उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना वसूला जा रहा है।
बैंकों द्वारा दी गई यह राहत केवल ‘न्यूनतम शेष राशि’ के जुर्माने पर है। अन्य सेवाएं जैसे SMS अलर्ट या एटीएम निकासी शुल्क पर बैंक के पुराने नियम लागू रह सकते हैं।
















