
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से न्याय की एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है, यहाँ के किसानों का करीब चार दशकों से चला आ रहा लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने उन किसानों को मुआवजे का भुगतान शुरू कर दिया है, जिनकी जमीन पर बिना अधिग्रहण किए ही दशकों पहले सड़क बना दी गई थी।
Table of Contents
क्या है पूरा मामला?
मामला 1983 का है, जब उत्तर प्रदेश और हरियाणा को जोड़ने के लिए बागपत-सोनीपत मार्ग का निर्माण शुरू हुआ था, उस समय विभाग ने जल्दबाजी में गौरीपुर जवाहर नगर और निवाड़ा गांव के किसानों की करीब 4.96 हेक्टेयर जमीन का औपचारिक अधिग्रहण (Land Acquisition) किए बिना ही सड़क तैयार कर दी थी साल 1987 में इस मार्ग पर यातायात भी शुरू हो गया, लेकिन अपनी जमीन खोने वाले 245 किसान मुआवजे के लिए दफ्तरों के चक्कर काटते रह गए।
43 साल का संघर्ष और करोड़ों का मुआवजा
पीढ़ी दर पीढ़ी चले इस संघर्ष के बाद अब जाकर प्रशासन ने किसानों की सुध ली है सरकार द्वारा इस मुआवजे के लिए कुल 5.25 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है।
ताजा अपडेट
- अब तक विभाग ने 2.27 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी है।
- प्रथम चरण में 82 किसानों के नाम जमीन के बैनामे (Sale Deed) दर्ज किए जा चुके हैं।
- शेष किसानों को भी बजट की उपलब्धता के आधार पर जल्द भुगतान करने की प्रक्रिया जारी है।
किसानों में खुशी की लहर
दशकों पुराने इस विवाद के सुलझने से प्रभावित परिवारों में खुशी का माहौल है किसानों का कहना है कि यह उनकी लंबी कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई की जीत है, अधिकारियों के मुताबिक, जमीनों के बैनामे की प्रक्रिया तेज कर दी गई है ताकि बचे हुए किसानों को भी उनका हक समय पर मिल सके।
















