
उत्तर प्रदेश के लाखों राशन कार्ड धारकों के लिए फरवरी माह में एक बड़ा सरप्राइज है। कोटे की दुकानों पर अब गेहूं की मात्रा घटाकर चावल बढ़ा दिया गया है। खाद्य आयुक्त के निर्देश पर शासन द्वारा रातोंरात खाद्यान्न वितरण प्रणाली में यह संशोधन किया गया है। अंत्योदय और पात्र गृहस्थी (PHH) कार्डधारकों को कुल खाद्यान्न की मात्रा वही रहेगी, लेकिन अनुपात बदल गया है। यह कदम स्थानीय खाद्य आदतों, स्टॉक संतुलन और कालाबाजारी रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
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नई व्यवस्था का पूरा खुलासा
नई व्यवस्था के तहत अंत्योदय कार्डधारकों को कुल 35 किलो खाद्यान्न मिलेगा, लेकिन ब्रेकअप बदल गया है। पहले 14 किलो गेहूं और 21 किलो चावल मिलता था, अब फरवरी में सिर्फ 10 किलो गेहूं और 25 किलो चावल वितरित होगा। यानी चार किलो गेहूं कम हो गया, जबकि चावल में इतनी ही बढ़ोतरी हुई। इसी तरह, पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को प्रति यूनिट या व्यक्ति पांच किलो खाद्यान्न मिलेगा। पहले दो किलो गेहूं और तीन किलो चावल था, अब एक किलो गेहूं और चार किलो चावल। यह बदलाव चावल-प्रधान पूर्वांचल मंडलों जैसे वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़ और मिर्जापुर में लागू है।
वहीं गेहूं-प्रधान पश्चिमी मंडलों (बरेली, मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मुरादाबाद, सहारनपुर) में उलटा फॉर्मूला है। यहां अंत्योदय को 21 किलो गेहूं + 14 किलो चावल, और PHH को प्रति यूनिट तीन किलो गेहूं + दो किलो चावल मिलेगा। कुल मात्रा अपरिवर्तित: अंत्योदय 35 किलो, PHH प्रति यूनिट पांच किलो। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि फरवरी के वितरण के लिए गेहूं-चावल की आपूर्ति इसी अनुपात में कोटेदारों तक पहुंच चुकी है। e-PDS पोर्टल पर जाकर राशनकार्ड धारक अपने जिले का विवरण चेक कर सकते हैं।
कार्डधारकों की क्या प्रतिक्रिया?
यह बदलाव कोटेदारों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। एक वरिष्ठ कोटेदार ने बताया, “सर्दियों में ग्राहकों की गेहूं की डिमांड चरम पर होती है। चावल ज्यादा होने से उन्हें मनाना पड़ रहा है। अगर पूरा चावल ही देते, तो आसान होता।” वाराणसी जिले के एक कोटेदार ने कहा कि कई कार्डधारक गेहूं की पुरानी मात्रा पर अड़े हैं, जिससे झगड़े हो रहे हैं। विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि शासन द्वारा आवंटित मात्रा ही वितरित हो, अन्यथा कार्रवाई होगी।
कार्डधारकों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। पूर्वांचल की एक गृहिणी राधा ने कहा, “चावल अच्छा है, लेकिन रोटी के लिए गेहूं चाहिए।” वहीं, गोरखपुर के रामू ने स्वागत किया, “हमारे इलाके में चावल ज्यादा खाते हैं, यह सही फैसला है।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अनाज की बर्बादी रोकेगा और कालाबाजारी पर लगाम लगाएगा। सर्दी में गेहूं स्टॉक ज्यादा बिकता है, लेकिन चावल लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।
सरकार का तर्क और आगे की राह
खाद्य एवं रसद विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “स्थानीय खपत पैटर्न के आधार पर मंडलवार बदलाव किया गया है। स्टॉक बैलेंस बनाए रखने से PDS सिस्टम मजबूत होगा।” वितरण 1 फरवरी से शुरू हो चुका है, और अब तक 70% राशन वितरित हो चुका। विभाग ने कोटेदारों को ट्रेनिंग और प्रचार के निर्देश दिए हैं। यदि समस्या बनी रहती है, तो हेल्पलाइन 1967 पर शिकायत दर्ज कराएं।
| श्रेणी | पुराना कोटा (किलो) | नया कोटा (पूर्वांचल, किलो) | नया कोटा (पश्चिम, किलो) |
|---|---|---|---|
| अंत्योदय | गेहूं 14 + चावल 21 | गेहूं 10 + चावल 25 | गेहूं 21 + चावल 14 |
| PHH (प्रति यूनिट) | गेहूं 2 + चावल 3 | गेहूं 1 + चावल 4 | गेहूं 3 + चावल 2 |
यह बदलाव गरीबों के लिए राहत या परेशानी? समय बताएगा। सरकार का इरादा नेक है, लेकिन जमीनी क्रियान्वयन पर नजर रखनी होगी। राशनकार्ड धारक सतर्क रहें और कोटेदारों से सही जानकारी लें।
















