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Marriage Certificate: शादी का रजिस्ट्रेशन क्यों है जरूरी! जानें घर बैठे सर्टिफिकेट बनाने का ऑनलाइन तरीका और फायदे

शादी के बाद ये छोटी सी औपचारिकता न करने से पासपोर्ट, लोन, संपत्ति सब अटक सकता है। महिलाओं के हक की पूरी गारंटी लें, ऑनलाइन तरीका और फायदे जानें, अभी पढ़ें वरना पछताएंगे!

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भारत में हर साल लाखों शादियां धूमधाम से होती हैं, लेकिन अधिकांश जोड़े कानूनी रजिस्ट्रेशन को नजरअंदाज कर देते हैं। यह मैरिज सर्टिफिकेट सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि जीवनभर की कानूनी सुरक्षा का आधार है। सुप्रीम कोर्ट के 2006 के ऐतिहासिक फैसले के बाद भी ग्रामीण इलाकों में 99 प्रतिशत और शहरों में 70-80 प्रतिशत शादियां बिना पंजीकरण के रह जाती हैं, जो भविष्य में बड़े विवाद पैदा करती हैं। महिलाओं के अधिकारों की रक्षा से लेकर सरकारी योजनाओं तक, यह छोटा कदम जीवन को मजबूत बनाता है।

Marriage Certificate: शादी का रजिस्ट्रेशन क्यों है जरूरी! जानें घर बैठे सर्टिफिकेट बनाने का ऑनलाइन तरीका और फायदे

क्यों अनिवार्य है रजिस्ट्रेशन?

शादी का रजिस्ट्रेशन हिंदू विवाह अधिनियम 1955 या विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत किया जाता है, जो पूरे देश में मान्य है। यह शादी को सरकारी दस्तावेज बनाता है, जिससे पति-पत्नी का रिश्ता अदालतों में साबित हो सके। दिल्ली हाईकोर्ट ने जनवरी 2026 में कहा कि यह औपचारिकता जरूरी है, लेकिन वैवाहिक सद्भाव का सबूत नहीं।

फिर भी, बिना इसके पासपोर्ट-वीजा, संयुक्त बैंक खाता खोलना, संपत्ति खरीदना या लोन लेना नामुमकिन हो जाता है। कानपुर जैसे शहरों में 2025 में हजारों जोड़ों ने इसे कराया, जो जागरूकता बढ़ने का संकेत है। ग्रामीण क्षेत्रों में धोखाधड़ी और विवादों को रोकने के लिए यह अनिवार्य हो चुका है। कुल मिलाकर, यह महिलाओं को गुजारा भत्ता, संपत्ति अधिकार और घरेलू हिंसा के खिलाफ मजबूत हथियार देता है।

घर बैठे ऑनलाइन प्रक्रिया

डिजिटल इंडिया की बदौलत अब ज्यादातर राज्य e-District पोर्टल, CSC सेंटर्स या राज्य सरकार की वेबसाइट से मैरिज सर्टिफिकेट जारी करते हैं। प्रक्रिया सरल और समय बचाने वाली है, बिना किसी कार्यालय चक्कर के।

  • अपने राज्य की आधिकारिक वेबसाइट (जैसे Delhi e-District, Punjab e-Seva या संबंधित SDM पोर्टल) पर जाएं और नए यूजर के रूप में रजिस्टर करें।
  • ‘Marriage Registration’ या ‘विवाह पंजीकरण’ विकल्प चुनें, आवेदन फॉर्म भरें जिसमें शादी की तारीख, जगह, दोनों पक्षों के नाम, पता और फोटो डालें।
  • जरूरी दस्तावेज स्कैन करके अपलोड करें: आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, शादी के 3 फोटो, दो गवाहों के आईडी प्रूफ और यदि तलाकशुदा तो पुराना प्रमाण-पत्र।
  • ऑनलाइन फीस (10-50 रुपये प्रति वर्ष) जमा करें और अपॉइंटमेंट बुक करें; कई राज्यों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शपथ होती है।
  • सत्यापन के 15-60 दिनों बाद डिजिटल सर्टिफिकेट डाउनलोड करें या डाक से प्राप्त करें।
  • स्टेटस चेक करने के लिए आवेदन नंबर से पोर्टल पर लॉगिन करें।

ऑफलाइन विकल्प के लिए SDM या तहसील कार्यालय जाएं, लेकिन ऑनलाइन तरीका तेज और सुविधाजनक है। पहले से शादीशुदा जोड़ों के लिए भी यह लागू है, बस शादी के प्रमाण के साथ आवेदन करें।

प्रमुख फायदे क्या हैं?

मैरिज सर्टिफिकेट तलाक, बच्चों की कस्टडी या बीमा क्लेम जैसे मामलों में अदालती सबूत बनता है। सरकारी योजनाओं जैसे पेंशन, राशन कार्ड या स्कॉलरशिप में आसानी होती है। NRI जोड़ों के लिए विदेशी दूतावासों में मान्यता मिलती है। यह संपत्ति विवाद रोकता है, महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा देता है और कानूनी झंझटों से बचाता है। समय और धन की बचत के साथ, यह पारिवारिक स्थिरता सुनिश्चित करता है।

अभी देरी न करें, अपने राज्य की वेबसाइट चेक करें और आवेदन करें। यह छोटी जिम्मेदारी बड़ा सुरक्षा कवच देगी। शादी का बंधन आसमानी हो या धरती का, कानूनी मुहर जरूरी है!

Author
info@ortpsa.in

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