आम आदमी के लिए घर या जमीन खरीदना अब पहले से कहीं आसान होने वाला है। सरकार ने आयकर नियमों में बड़ा बदलाव लाने का ऐलान किया है। इसके तहत बीस लाख रुपये तक कीमत वाली संपत्ति के लेन-देन में PAN कार्ड दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पहले यह सीमा दस लाख रुपये थी, जो आज के महंगे बाजार में छोटे-मोटे सौदों के लिए भी परेशानी का सबब बनी हुई थी। यह कदम खासकर मध्यम वर्ग और छोटे शहरों के निवासियों को सीधा फायदा पहुंचाएगा।

पुराने नियमों के मुताबिक, दस लाख से ज्यादा मूल्य की कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने पर PAN कार्ड अनिवार्य होता था। इसका मकसद बड़े लेन-देन पर नजर रखना और काले धन पर अंकुश लगाना था। लेकिन रियल एस्टेट की कीमतें तेजी से बढ़ने के कारण यह सीमा व्यावहारिक नहीं रह गई थी। उदाहरण के तौर पर, पंजाब के लुधियाना जैसे शहरों में एक छोटा प्लॉट या फ्लैट भी पंद्रह-उन्नीस लाख में आ जाता है। ऐसे में साधारण खरीदारों को PAN बनवाने में समय और मेहनत खर्च करनी पड़ती थी। नया प्रस्ताव इस जटिलता को दूर कर छोटे व्यापारियों और पहली बार घर लेने वालों को राहत देगा।
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नए नियमों का दायरा और असर
सरकार ने इनकम टैक्स के ड्राफ्ट नियमों में यह बदलाव पेश किया है, जो बीस लाख रुपये से कम कीमत वाली जमीन, मकान या प्लॉट पर लागू होगा। इससे ऊपर के सौदों में PAN की अनिवार्यता कायम रहेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम बाजार को गति देगा और कागजी कामकाज को सरल बनाएगा। खासकर ग्रामीण इलाकों और Tier-2 शहरों में जहां सस्ती संपत्ति की मांग रहती है, वहां रजिस्ट्री प्रक्रिया तेज होगी। महिलाओं और युवाओं को भी फायदा मिलेगा, जो अक्सर PAN बनवाने में टालमटोल करते हैं।
रियल एस्टेट बाजार के जानकारों का कहना है कि दस लाख की पुरानी सीमा बाजार की हकीकत से मेल नहीं खा रही थी। आज छोटे घर भी इससे महंगे साबित हो रहे हैं। बीस लाख तक छूट से लेन-देन में पारदर्शिता बनी रहेगी, क्योंकि बड़े डील्स पर निगरानी जारी रहेगी। टैक्स सलाहकार बता रहे हैं कि आधार या अन्य पहचान पत्र से छोटे सौदे पूरे हो सकेंगे। हालांकि कुछ राज्यों ने स्थानीय स्तर पर PAN को सख्ती से लागू किया है, लेकिन केंद्रीय नियम पूरे देश पर छा जाएंगे।
चुनौतियां और भविष्य की राह
यह बदलाव छोटे स्तर पर काले धन के दुरुपयोग की आशंका पैदा कर सकता है, लेकिन बड़े लेन-देन पर फोकस से इसका असर कम होगा। सरकार ने जनता से सुझाव मांगे हैं ताकि नियमों को और मजबूत बनाया जा सके। अगर सब ठीक रहा तो ये प्रावधान पहली अप्रैल से अमल में आ जाएंगे। बजट सत्र से पहले यह घोषणा आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देगी।
खरीदारों के लिए सलाह
फिलहाल दस लाख से ऊपर के सौदों में PAN जरूरी है। नए नियम आने तक स्थानीय रजिस्ट्री कार्यालय या तहसील से ताजा जानकारी लें। यह बदलाव न सिर्फ समय बचाएगा, बल्कि रियल एस्टेट को आम आदमी की पहुंच में लाएगा। छोटे शहरों में निवेश का सही समय है। सरकार का यह प्रयास आर्थिक विकास की नई गति सेट करेगा।
















