वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल के बीच सोना और चांदी की रौनक कम होने का नाम नहीं ले रही। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और भारत में हालिया बजट के असर से फरवरी में कीमतों में कुछ गिरावट जरूर आई, लेकिन जानकारों का यकीन है कि पूरे 2026 में सोना चांदी पर भारी पड़ेगा। अगले साल सोने की कीमतें 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम को पार कर सकती हैं, जबकि चांदी 3 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंचेगी। अभी का सुधार निवेश के लिए सुनहरा मौका बन गया है।

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बाजार की ताजा तस्वीर
पिछले हफ्ते 25 फरवरी को देशभर में 24 कैरेट सोने की कीमत 1 लाख 61 हजार 890 रुपये प्रति 10 ग्राम रही, यानी प्रति ग्राम 16 हजार 189 रुपये। चांदी 2 लाख 69 हजार रुपये से ज्यादा प्रति किलो पर बिकी। जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से फिसलाव आया, खासकर डॉलर के मजबूत रुख और बजट चर्चाओं से। केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं, जो इसकी सुरक्षित संपत्ति की छवि को मजबूत कर रहा है। चांदी पर सोलर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक गाड़ियां और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों की मांग भारी पड़ रही है, लेकिन इसकी कीमतें सोने से कहीं ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली रहती हैं।
सोना क्यों आगे निकलेगा?
सोना हमेशा से स्थिरता का प्रतीक रहा है। यह सुरक्षित निवेश का राजा है, जो आर्थिक तनाव या युद्ध जैसे हालात में चमकता है। 2026 में इसका औसत भाव 5 से 6 हजार डॉलर प्रति औंस रह सकता है, यानी भारत में 30 से 45 फीसदी की बढ़ोतरी। चांदी भले ही 87 से 135 फीसदी तक उछाल दिखाए, लेकिन इसका जोखिम दोगुना है। डॉलर मजबूत होने पर चांदी पहले गिरती है, जैसा फरवरी में 19 फीसदी की टूट के साथ हुआ। सोना मात्र 2 फीसदी नीचे आया। विशेषज्ञ कहते हैं, सोना लंबे समय के लिए धन बचाने वाला है, जबकि चांदी छोटी अवधि में मुनाफा दे सकती है।
डॉलर की मजबूती का क्या असर?
अमेरिकी डॉलर का दबदबा दोनों धातुओं पर असर डालता है, क्योंकि ये डॉलर में ट्रेड होती हैं। ट्रंप सरकार की नीतियों से डॉलर और मजबूत हो सकता है। फिर भी सोना कम प्रभावित होता है। वैश्विक अनिश्चितताएं जैसे यूक्रेन संकट या मध्य पूर्व तनाव निवेशकों को सोने की ओर धकेल रही हैं। चांदी पर खनन में कमी और फंडों की आमद से राहत मिलेगी, लेकिन मंदी की आशंका इसे खतरनाक बनाती है। फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें घटने और चीन की फैक्ट्रियां पटरी पर आने से दोनों की चमक लौटेगी।
निवेश की सही रणनीति
अभी की गिरावट में खरीदारी का बेस्ट टाइम है। सोना जब 1.5 से 1.6 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर हो, तो SIP शुरू करें। सोने और चांदी का अनुपात 60:40 रखें। भारतीय निवेशक एमसीएक्स फ्यूचर्स, गोल्ड ईटीएफ या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड चुन सकते हैं। चांदी के लिए औद्योगिक मांग पर नजर रखें। भौतिक रूप में ज्वेलरी या सिक्के लें, लेकिन शुद्धता जांच लें। लुधियाना जैसे सराफा बाजारों में मध्यमवर्गीय परिवार सक्रिय हैं। पोर्टफोलियो में संतुलन बनाएं, सोना धन की रक्षा करेगा, चांदी विकास का रास्ता दिखाएगी।
मंदी या ब्याज दरें बढ़ने का खतरा है, इसलिए ज्यादा लालच न करें। 2026 सोने का दबदबा वाला साल साबित हो सकता है। सही समय पर कदम उठाएं, चमक आपके हाथ में होगी!
















