
कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) देश की करोड़ों सैलरीड कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के लिए सबसे सुरक्षित बचत योजनाओं में शुमार है। हर महीने वेतन का 12 प्रतिशत नियोक्ता और कर्मचारी दोनों मिलकर ईपीएफ खाते में जमा करते हैं, जो ब्याज के साथ बढ़ता रहता है। लेकिन आपात जरूरतों जैसे मकान, शादी, शिक्षा या बेरोजगारी में कई लोग जल्दबाजी में पूरा या आंशिक बैलेंस निकाल लेते हैं। समस्या तब आती है जब 5 साल की निरंतर सेवा पूरी होने से पहले निकासी हो जाए।
आयकर नियमों के तहत ऐसी स्थिति में 10 प्रतिशत टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) कट जाता है, जो लाखों कर्मचारियों को महंगा पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गलती नौकरी बदलने या छोटी-मोटी जरूरतों के चक्कर में होती है, जबकि सही प्लानिंग से टैक्स पूरी तरह बचाया जा सकता है।
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ईपीएफ निकासी के मुख्य नियम
ईपीएफ निकासी के नियम सरल लेकिन सख्त हैं। सामान्य सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष मानी जाती है, तब पूरी राशि बिना किसी टैक्स के निकाली जा सकती है। 55 वर्ष के बाद रिटायरमेंट पर भी फुल विड्रॉल की अनुमति है। अगर 54 वर्ष की उम्र पार कर ली हो, तो सेवानिवृत्ति से एक साल पहले 90 प्रतिशत तक बैलेंस निकाल सकते हैं। बेरोजगारी की स्थिति में एक महीने बाद 75 प्रतिशत निकासी संभव है, बशर्ते शेष राशि नई नौकरी के ईपीएफ खाते में ट्रांसफर हो जाए। दो महीने की बेरोजगारी के बाद तो पूरा बैलेंस भी निकाल लिया जा सकता है।
खास बात, आधार को यूएएन (यूनिफाइड अकाउंट नंबर) से लिंक करने और नियोक्ता की ऑनलाइन मंजूरी मिलने पर बिना उनके हस्ताक्षर के भी क्लेम सेटल हो जाता है। 2026 में ईपीएफओ नया ऐप ला रहा है, जिसमें यूपीआई से 25,000 रुपये तक तुरंत निकासी और 5 लाख तक के क्लेम 3 दिनों में ऑटो-अप्रूव होंगे। लेकिन टैक्स नियम वही रहेंगे।
5 साल का नियम
अब आते हैं मुख्य जाल पर – 5 साल का नियम। आयकर अधिनियम की धारा 10(12) और 10(12A) के अनुसार, सभी नियोक्ताओं के साथ कुल 5 साल (लगभग 60 महीने) की निरंतर सेवा पूरी होनी चाहिए। नौकरी बदलने पर पुराने खाते का बैलेंस नए में ट्रांसफर होने पर यह अवधि जुड़ जाती है। अगर इससे पहले निकासी हो और राशि 50,000 रुपये से अधिक हो, तो 10 प्रतिशत टीडीएस कटेगा, बशर्ते पैन कार्ड लिंक हो। पैन न होने पर 20 या 30 प्रतिशत तक कटौती हो सकती है।
50,000 से कम पर टीडीएस नहीं कटता, लेकिन कुल आय टैक्सेबल स्लैब में आने पर रिटर्न में टैक्स देना पड़ेगा। उदाहरण के लिए, अगर आपकी कुल सेवा 4 साल 11 महीने है, तो कुछ दिनों का इंतजार न करने पर हजारों रुपये का नुकसान हो सकता है। फॉर्म 26AS में टीडीएस दिखता है, जिसका आईटीआर में क्रेडिट लिया जा सकता है। अगर कुल आय टैक्स-फ्री लिमिट से नीचे हो, तो फॉर्म 15G (60 वर्ष से कम उम्र) या 15H (वरिष्ठ नागरिक) भरकर टीडीएस से बचाव संभव है।
टैक्स बचाव के आसान उपाय
कई कर्मचारी मेडिकल, शादी या मकान खरीद जैसी छूट वाली कैटेगरी में आंशिक निकासी करते हैं, जहां आमतौर पर टैक्स नहीं लगता। लेकिन फाइनल सेटलमेंट पर 5 साल का नियम लागू होता है। हालिया बजट चर्चाओं में 5 साल को 3 साल करने की बात हुई, लेकिन फरवरी 2026 तक कोई बदलाव नहीं आया। ईपीएफओ पोर्टल पर हमेशा अपना यूएएन चेक करें, क्योंकि गलत क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं- जल्दबाजी न करें, ट्रांसफर करते रहें। छोटी निकासी के बजाय कम ब्याज वाले लोन लें। रिटर्न फाइलिंग समय पर करें ताकि रिफंड मिल सके। अगर आप नौकरी बदल रहे हैं, तो सबसे पहले ईपीएफ ट्रांसफर सुनिश्चित करें। इस तरह न सिर्फ टैक्स बचेगा, बल्कि सेवानिवृत्ति कोष भी मजबूत रहेगा। ईपीएफ न केवल बचत है, बल्कि भविष्य की सुरक्षा है – इसे बर्बाद न करें।
















