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सावधान! होटल-ढाबों की काली प्लास्टिक में खाना पड़ सकता है भारी; राज्यसभा में उठा मुद्दा, जानें कैसे शरीर में घुल रहा है ‘जहर’

 अगर आप भी अक्सर होटल या ढाबों से काले प्लास्टिक के कंटेनर (Black Plastic Containers) में खाना पैक करवाते हैं, तो सावधान हो जाएं राज्यसभा में हाल ही में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है, जिसमें विशेषज्ञों ने इन बर्तनों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है वैज्ञानिकों और सांसदों का कहना है कि यह काला प्लास्टिक धीरे-धीरे हमारे शरीर में 'धीमा जहर' (Slow Poison) घोल रहा है

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सावधान! होटल-ढाबों की काली प्लास्टिक में खाना पड़ सकता है भारी; राज्यसभा में उठा मुद्दा, जानें कैसे शरीर में घुल रहा है 'जहर'
सावधान! होटल-ढाबों की काली प्लास्टिक में खाना पड़ सकता है भारी; राज्यसभा में उठा मुद्दा, जानें कैसे शरीर में घुल रहा है ‘जहर’

 अगर आप भी अक्सर होटल या ढाबों से काले प्लास्टिक के कंटेनर (Black Plastic Containers) में खाना पैक करवाते हैं, तो सावधान हो जाएं राज्यसभा में हाल ही में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है, जिसमें विशेषज्ञों ने इन बर्तनों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है वैज्ञानिकों और सांसदों का कहना है कि यह काला प्लास्टिक धीरे-धीरे हमारे शरीर में ‘धीमा जहर’ (Slow Poison) घोल रहा है। 

ई-कचरे से बनकर आपकी थाली तक पहुँच रहा है जहर

रिपोर्ट्स के अनुसार, बाजार में उपलब्ध अधिकांश काला प्लास्टिक रीसाइकिल किए गए ई-कचरे (पुराने टीवी, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक्स) से बनाया जाता है। इसमें मौजूद विभिन्न रसायनों और गंदगी को छिपाने के लिए अक्सर गहरे काले रंग का इस्तेमाल किया जाता है। 

क्यों है यह बेहद खतरनाक?

जब इन काले कंटेनरों में गर्म, तैलीय या मसालेदार खाना रखा जाता है, तो प्लास्टिक की संरचना कमजोर हो जाती है और इसमें मौजूद जहरीले रसायन खाने में घुलने (Leaching) लगते हैं एक शोध के मुताबिक, माइक्रोवेव में 3 मिनट तक गर्म करने पर 1 वर्ग सेंटीमीटर प्लास्टिक से लाखों माइक्रोप्लास्टिक और अरबों नैनोप्लास्टिक कण निकल सकते हैं।

स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव

  • कैंसर का खतरा: काले प्लास्टिक में PAHs और BPA जैसे रसायन पाए जाते हैं, जो कैंसर (विशेषकर स्तन और प्रोस्टेट कैंसर) के खतरे को बढ़ाते हैं।
  • हार्मोनल असंतुलन: इसमें मौजूद थैलेट्स (Phthalates) एंडोक्राइन सिस्टम को बाधित करते हैं, जिससे थायराइड, मधुमेह और प्रजनन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
  • बच्चों का विकास: यह रसायन बच्चों के मस्तिष्क विकास को प्रभावित कर सकते हैं और उनके IQ को कम कर सकते हैं।
  • हृदय और अंग विफलता: लंबे समय तक इन कणों के सेवन से शरीर में सूजन बढ़ सकती है, जिससे हार्ट फेल्योर का खतरा भी रहता है। 

बचाव के लिए क्या करें?

  • काले डिब्बों का दोबारा इस्तेमाल न करें: लोग अक्सर इन डिब्बों को धोकर रसोई में मसाले या अन्य सामान रखने के लिए इस्तेमाल करते हैं, जो सबसे ज्यादा खतरनाक है।
  • माइक्रोवेव से दूरी: इन कंटेनरों को कभी भी माइक्रोवेव में गर्म न करें।
  • सुरक्षित विकल्प चुनें: होटल से खाना आते ही उसे तुरंत स्टेनलेस स्टील, कांच या सिरेमिक के बर्तनों में पलट लें।

राज्यसभा में उठी इस आवाज ने स्पष्ट कर दिया है कि सुविधा के नाम पर इस्तेमाल हो रहे ये सस्ते कंटेनर भविष्य में एक बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकते हैं।

Black Plastic Food Packaging Black Plastic Food Packaging in Hotels and Dhabas Sparks Health Concerns
Author
info@ortpsa.in

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