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High Court Big Order: धर्म बदलने या इंटरकास्ट मैरिज से नहीं बदलती जाति, कोर्ट का अहम फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ कहा, जाति जन्मजात है। धर्मांतरण या अंतरजातीय विवाह से SC/ST दर्जा समाप्त। जितेंद्र साहनी मामले में झूठे प्रमाणपत्र रद्द, जांच के आदेश। अनुच्छेद 341 के तहत केवल हिंदू/सिख/बौद्ध को लाभ। आंध्र HC ने पुष्टि की। हजारों नौकरियां प्रभावित, आरक्षण दुरुपयोग रुकेगा।

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High Court Big Order: धर्म बदलने या इंटरकास्ट मैरिज से नहीं बदलती जाति, कोर्ट का अहम फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि जाति जन्मजात होती है और न तो धर्म परिवर्तन से न ही अंतरजातीय विवाह से यह बदल सकती है। यह फैसला आरक्षण लाभ के दुरुपयोग को रोकने के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। कोर्ट ने कहा, अनुसूचित जाति (SC/ST) का दर्जा केवल मूल हिंदू, सिख या बौद्ध सदस्यों के लिए सुरक्षित है। इससे धर्मांतरण करने वालों का लाभ समाप्त हो जाएगा।

फैसले की पृष्ठभूमि

यह मामला जितेंद्र साहनी से जुड़ा है, जिन्होंने हिंदू से ईसाई बनने के बाद भी SC प्रमाणपत्र का उपयोग जारी रखा। याचिकाकर्ता ने सरकारी नौकरी और अन्य लाभों के लिए झूठा दावा किया। बेंच ने इसे संविधान के साथ धोखाधड़ी करार दिया। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि जाति का निर्धारण जन्म के समय होता है, जो जीवनभर अपरिवर्तनीय रहती है। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने भी इसी तरह का फैसला सुनाया, जहां धर्म परिवर्तन पर SC दर्जा समाप्त होने की बात कही गई। सुप्रीम कोर्ट के C. Selvarani मामले ने इसकी पुष्टि की, जिसमें केवल आरक्षण के लिए झूठा धर्मांतरण अस्वीकार्य ठहराया गया।

संवैधानिक आधार

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 SC/ST को परिभाषित करते हैं, जो मुख्य रूप से हिंदू समाज के निचले वर्गों से जुड़े हैं। 1950 के राष्ट्रपति आदेश के अनुसार, ईसाई या मुस्लिम बनने पर ये लाभ खत्म हो जाते हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि वास्तविक आस्था के बिना धर्म परिवर्तन केवल लाभ के लिए अनुचित है। अंतरजातीय विवाह में भी जाति मूल व्यक्ति की ही मानी जाती है, पत्नी या पति की जाति स्वतः नहीं अपनाई जा सकती। यह फैसला राष्ट्रीय स्तर पर लागू हो सकता है, क्योंकि जिलाधिकारियों को प्रमाणपत्रों की तीन-चार माह में जांच के आदेश दिए गए हैं।

कानूनी प्रभाव और चुनौतियां

इस फैसले से हजारों झूठे SC/ST प्रमाणपत्र रद्द हो सकते हैं। सरकारी नौकरियां, शैक्षणिक आरक्षण और प्रमोशन प्रभावित होंगे। कोर्ट ने सख्ती से कहा कि दुरुपयोग पर कानूनी कार्रवाई होगी, जिसमें जुर्माना और आपराधिक मुकदमे शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आरक्षण व्यवस्था को मजबूत करेगा, लेकिन अल्पसंख्यक अधिकारों पर बहस छेड़ सकता है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने पहले वयस्कों को धर्म परिवर्तन और विवाह की स्वतंत्रता दी थी, लेकिन लाभ के संदर्भ में सीमाएं स्पष्ट कीं।

सामाजिक बहस

फैसले ने जाति व्यवस्था पर नई चर्चा छेड़ दी है। समर्थक इसे न्यायसंगत मानते हैं, जबकि आलोचक इसे कट्टरता से जोड़ते हैं। सुप्रीम कोर्ट में अपील की संभावना है। सरकार को प्रमाणपत्र सत्यापन प्रक्रिया मजबूत करने की सलाह दी गई। यह फैसला 2026 के आरक्षण विवादों के बीच आया, जब SC/ST एक्ट पर बहस तेज है। इससे लाखों लोगों के जीवन पर इसका दूरगामी असर पड़ेगा। हालाँकि हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि जाति जन्म का प्रमाण है, न कि परिवर्तन का विषय। यह संविधान की मूल भावना को मजबूत करता है।

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info@ortpsa.in

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