
हिंदू धर्म में चैत्र अमावस्या का विशेष महत्व है, यह न केवल विक्रम संवत के अंतिम दिन के रुप में जानी जाती है, बल्कि पितरों के तर्पण और कष्टों से मुक्ति के लिए भी इसे बेहद फलदायी माना गया है, साल 2026 में चैत्र अमावस्या की सटीक तारीख को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
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तारीख को लेकर न हों भ्रमित, नोट करें सही समय
पंचांग गणना के अनुसार, अमावस्या तिथि की शुरुआत 18 मार्च 2026 को सुबह 08:25 बजे होगी, जबकि इसका समापन 19 मार्च 2026 को सुबह 06:52 बजे होगा शास्त्रों के अनुसार, पितृ कार्यों और स्नान-दान के लिए अलग-अलग समय का महत्व है:
- पितृ तर्पण और श्राद्ध: चूंकि पितृ पूजा के लिए ‘कुतप काल’ यानी दोपहर के समय अमावस्या तिथि का होना अनिवार्य है, इसलिए 18 मार्च 2026 (बुधवार) को श्राद्ध और तर्पण करना शास्त्रसम्मत रहेगा।
- स्नान और दान: सनातन धर्म में उदया तिथि का बड़ा महत्व है। अमावस्या की उदया तिथि 19 मार्च 2026 (गुरुवार) को प्राप्त हो रही है, अतः इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करना सर्वोत्तम होगा।
इस ‘एक चीज’ का दान बदलेगा भाग्य
ज्योतिष शास्त्र और मान्यताओं के अनुसार, चैत्र अमावस्या पर ‘काले तिल’ (Black Sesame) का दान करने से व्यक्ति के जीवन के बड़े से बड़े कष्ट दूर हो जाते हैं।
- पितृ दोष से मुक्ति: जल में काले तिल मिलाकर पितरों को अर्घ्य देने से पूर्वज तृप्त होते हैं और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
- शनि दोष का प्रभाव कम: काले तिल का दान शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभावों को कम करने में सहायक माना गया है।
- सुख-समृद्धि: काले तिल के साथ अन्न, गुड़ और घी का दान करने से घर में दरिद्रता का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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अमावस्या के साथ ही हिंदू नववर्ष का आगाज
2026 की चैत्र अमावस्या के साथ ही एक अद्भुत संयोग बन रहा है। 19 मार्च को अमावस्या समाप्त होते ही चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) का आरंभ हो जाएगा, इसी दिन सुबह 06:52 बजे के बाद घटस्थापना के साथ मां दुर्गा की उपासना शुरु होगी।
















