भारत में सोशल मीडिया के दौर पर अब एक नया चरण शुरू होने की तैयारी दिख रही है। फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स की पहचान को और ज़्यादा सख्ती से लिंक करने की दिशा में सरकार ने एक नया मास्टरप्लान तैयार करना शुरू किया है। खबरों की मानें तो आने वाले समय में इन प्लेटफॉर्म्स के कुछ यूजर ग्रुप्स के लिए सरकारी आईडी या KYC जैसी व्यवस्था लागू हो सकती है, जिसके बाद बिना आधिकारिक दस्तावेज जमा कराए कुछ प्रोफाइल्स पर रोक या हटाने का जोखिम बढ़ सकता है।

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KYC और वेरिफाइड आईडी का नया फ्रेमवर्क
सरकार सोशल मीडिया पर बढ़ते फेक अकाउंट्स, ऑनलाइन फ्रॉड, झूठे राजनीतिक प्रचार और फर्जी कंटेंट के खतरे को देखते हुए एक नया डिजिटल नियंत्रण मॉडल तैयार कर रही है। इसके तहत बड़े इनफ्लुएंसर्स, बिजनेस पेजेज, राजनीतिक प्रोफाइल्स और रिपीट ऑफेंडर अकाउंट्स पर अब सख्त पहचान सत्यापन की संभावना देखी जा रही है। इसका उद्देश्य यह है कि जो अकाउंट बार‑बार नियम तोड़ते हैं या बड़े पैमाने पर कंटेंट फैलाते हैं, वे अपनी वास्तविक एल्फ‑आईडेंटिटी के साथ काम करें, न कि अनाम या नकली प्रोफाइल से।
अभी तक आम यूजर्स के लिए फेसबुक या इंस्टाग्राम पर अनिवार्य राष्ट्रीय आईडी जैसे Aadhaar, PAN या ड्राइविंग लाइसेंस अपलोड करना लागू नहीं है। हालांकि, यदि यह नया मास्टरप्लान आने वाले समय में कानूनी रूप लेता है, तो धीरे‑धीरे बड़े स्केल पर चल रहे प्रोमोशन, व्यावसायिक खातों या राजनीतिक प्रचार करने वाले अकाउंट्स पर वेरिफिकेशन प्रणाली ज़रूरी हो सकती है।
3 साल तक इस्तेमाल न करने पर अकाउंट डिलीट
दूसरी तरफ डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून के तहत एक और प्रपोजल चर्चा में है: अगर कोई यूजर अपना फेसबुक या इंस्टाग्राम अकाउंट लगभग 3 साल तक इस्तेमाल नहीं करता, तो उस अकाउंट को प्लेटफॉर्म को परमानेंट रूप से हटाने का आदेश दिया जा सकता है। इसका लक्ष्य यह है कि करोड़ों की संख्या में जमा “सोई” अकाउंट्स का निजी डेटा लंबे समय तक वेब पर न रहे, जिससे डेटा प्रोटेक्शन और गोपनीयता को बेहतर ढंग से सुरक्षित रखा जा सके।
इस सिस्टम के तहत अगर यूजर लगातार तीन साल तक अपना अकाउंट नहीं खोलता, तो प्लेटफॉर्म को उसे ऑटोमेटिक डिलीट करने का अधिकार दिया जा सकता है। इससे न सिर्फ डेटा स्टोरेज कम होगा, बल्कि लॉ‑एन्फोर्समेंट एजेंसियों के लिए डेटा एक्सेस की अवधि भी सीमित हो जाएगी। अभी यह सिर्फ नीति स्तर की चर्चा और ड्राफ्ट फेज़ में है, कोई अंतिम नोटिफिकेशन या तुरंत लागू नियम नहीं है।
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आम यूजर को अभी क्या करना चाहिए?
अभी की स्थिति में एक सामान्य यूजर के लिए यह स्पष्ट है कि नियमित रूप से उपयोग हो रहे फेसबुक या इंस्टाग्राम अकाउंट “बिना सरकारी ID के अचानक बंद” होने का कोई तुरंत खतरा मौजूद नहीं है। यदि भविष्य में नया कानून आता है और KYC‑आधारित वेरिफिकेशन लागू होता है, तो प्लेटफॉर्म यूजर्स को पहले से ईमेल, इन‑ऐप नोटिफिकेशन और अलर्ट के ज़रिए जानकारी देगा।
इस बीच यूजर्स के लिए सबसे सुरक्षित रहेगा कि वे अपना अकाउंट कम से कम साल‑दो‑साल में एक बार तो ज़रूर चेक करें, ताकि वह “3 साल इनएक्टिव” न हो जाए। साथ ही, फर्ज़ी नाम या नकली जानकारी से चल रहे फेक प्रोफाइल्स, स्पैम अकाउंट्स या फ्रॉड वाले पेजेज़ पर सरकार और प्लेटफॉर्म की नज़र ज़्यादा होगी, जहां पहचान सत्यापन जल्दी लागू हो सकता है।
इस नए मास्टरप्लान को लेकर डिजिटल राइट्स एक्सपर्ट्स अभी भी निजी जानकारी, मॉनिटरिंग की सीमा और बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों पर ज़्यादा नियंत्रण जैसे मुद्दों पर गहन बहस कर रहे हैं। अगर यह नीति आगे चलकर पूरी तरह बन कर लागू होती है, तो भारत के करोड़ों सोशल मीडिया यूजर्स को नए तरह की ज़िम्मेदारी और नियमों के साथ जुड़ना पड़ेगा।
















