
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग की असिस्टेंट ऑपरेटर रेडियो भर्ती 2005 को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन अभ्यर्थियों ने संशोधित परिणाम में निर्धारित कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, उन्हें नियुक्ति का अवसर मिलना चाहिए।
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क्या है पूरा मामला?
यह विवाद साल 2005 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। अभ्यर्थियों का मुख्य तर्क था कि मुख्य लिखित परीक्षा के बाद जारी की गई उत्तर कुंजी (Answer Key) में गंभीर त्रुटियाँ थीं, जिसके कारण उन्हें शुरुआत में कम अंक मिले और वे चयन से बाहर हो गए।
- पुनर्मूल्यांकन का असर: मामले की गंभीरता को देखते हुए जब उत्तरों का पुनर्मूल्यांकन किया गया, तो याचिकाकर्ताओं के अंक बढ़ गए।
- कट-ऑफ का गणित: संशोधित परिणामों के बाद अभ्यर्थियों के अंक उस श्रेणी के अंतिम चयनित उम्मीदवार (Cut-off) से अधिक हो गए, जिससे वे तकनीकी रूप से चयन के पात्र बन गए।
अदालत की कड़ी टिप्पणी
न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकलपीठ ने विभव सिंह और विक्रांत कुमार यादव सहित अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, कोर्ट ने कहा कि यदि अभ्यर्थी संशोधित मेरिट में कट-ऑफ से ऊपर हैं, तो उन्हें केवल विभाग की पुरानी गलतियों के कारण नौकरी से वंचित नहीं रखा जा सकता।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता पंकज कुमार गुप्ता और विजयभान सिंह ने पैरवी की, जिन्होंने कोर्ट के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा कि योग्य उम्मीदवारों का हक नहीं मारा जाना चाहिए।
अभ्यर्थियों के लिए जीत का बड़ा संदेश
इस फैसले के बाद अब पुलिस भर्ती बोर्ड को संशोधित सूची के आधार पर योग्य पाए गए उम्मीदवारों की नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल 2005 की भर्ती के लिए बल्कि भविष्य की प्रशासनिक त्रुटियों के सुधार के लिए भी एक नजीर साबित होगा।
















