Join Contact

1 अप्रैल से बदल जाएंगे दवाओं के रेट! बुखार, दर्द और इन्फेक्शन की 1000+ दवाएं महंगी; देखें

1 अप्रैल से बुखार, दर्द और संक्रमण की 1000+ दवाएं महंगी होंगी। दवा नियामक ने 0.6% मूल्यवृद्धि मंजूर की। आम मरीजों पर बोझ बढ़ेगा, लेकिन जेनेरिक दवाएं सस्ती रहेंगी। सतर्क रहें!

Published On:

एक अप्रैल 2026 से देशभर में आम बीमारियों की दवाओं के दामों में इजाफा होने वाला है। खासकर बुखार, दर्द निवारक और संक्रमण रोधी दवाओं समेत सैकड़ों जरूरी दवाओं की कीमतें थोड़ी महंगी हो जाएंगी। यह बदलाव दवा नियामक संस्था ने सकल मूल्य सूचकांक के हालिया आंकड़ों के आधार पर किया है, जिसमें औसतन आधा प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि का अनुमान है। रोजमर्रा की जिंदगी में दवाओं पर निर्भर करोड़ों लोग इस फैसले से प्रभावित होंगे।

1 अप्रैल से बदल जाएंगे दवाओं के रेट! बुखार, दर्द और इन्फेक्शन की 1000+ दवाएं महंगी; देखें

क्या है मूल्यवृद्धि का कारण?

दवा कंपनियों की बढ़ती लागत को देखते हुए यह सालाना समायोजन जरूरी माना गया है। कच्चे माल, पैकेजिंग और ढुलाई खर्चों में आई महंगाई ने दबाव बनाया है। वैश्विक बाजार में चल रही उथल-पुथल ने भी आयातित सामग्री के दामों को ऊंचा किया है। नियामक का मकसद उत्पादकों को घाटे से बचाना और बाजार में दवाओं की आपूर्ति बरकरार रखना है। हालांकि वृद्धि को न्यूनतम रखा गया ताकि आम मरीज पर ज्यादा बोझ न पड़े।

कौन सी दवाएं होंगी महंगी?

सबसे ज्यादा असर उन दवाओं पर पड़ेगा जो हर घर में इस्तेमाल होती हैं। बुखार और दर्द उतारने वाली पैरासिटामोल जैसी दवाओं की स्ट्रिप महंगी हो सकती है। संक्रमण से लड़ने वाली एंटीबायोटिक दवाएं जैसे एजिथ्रोमाइसिन भी इस दायरे में हैं। इसके अलावा खून की कमी दूर करने वाली गोलियां, विटामिन सप्लीमेंट्स, हृदय रोग और शुगर की दवाएं भी प्रभावित होंगी। कुल मिलाकर राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची में दर्ज सवा हजार के करीब दवाओं पर यह बदलाव लागू होगा। एक सामान्य स्ट्रिप के दाम में 10-20 पैसे से लेकर कुछ रुपये तक का फर्क पड़ सकता है।

यह भी पढ़ें- UP के युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी! ‘कौशल कनेक्ट सेल’ से अब अपने ही जिले में मिलेगी मनचाही नौकरी

आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर

मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को छोटे-मोटे खर्च में इजाफा करना पड़ेगा। खासकर गांवों और छोटे शहरों में जहां वैकल्पिक सस्ती दवाएं आसानी से न मिलें, वहां परेशानी बढ़ सकती है। पिछले कुछ सालों में भी ऐसी मामूली वृद्धियां होती रहीं हैं, लेकिन महंगाई के दौर में हर नया इजाफा चुभता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले सस्ती जेनेरिक दवाओं पर कम असर होगा।

सरकार क्या कर रही है?

सरकार ने जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भरोसा दिया है। जन औषधि केंद्रों पर सस्ती दवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। डॉक्टरों से सलाह है कि वे जरूरी दवाओं का ही पर्चा लिखें। उपभोक्ता संगठन पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं ताकि प्रभावित दवाओं की पूरी जानकारी सार्वजनिक हो। मरीजों को सुझाव है कि वे सतर्क रहें और सरकारी दुकानों से खरीदारी करें। बाजार में क्या प्रतिक्रिया उभरती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

Author
info@ortpsa.in

Leave a Comment

संबंधित समाचार