
सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक ‘सरकारी नोटिस’ तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि देश में फिर से लॉकडाउन लगाया जा सकता है इस खबर ने आम जनता के बीच हड़कंप मचा दिया है, लेकिन पड़ताल में यह दावा पूरी तरह से फर्जी (Fake) पाया गया है।
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वायरल दावे की सच्चाई: सिर्फ एक प्रैंक
सोशल मीडिया (WhatsApp और X) पर ‘गवर्नमेंट नोटिफिकेशन ऑन पार्शियल लॉकडाउन’ नाम से एक PDF फाइल साझा की जा रही थी। इस नोटिस में भारत सरकार के आधिकारिक लोगो (अशोक चक्र) का इस्तेमाल किया गया था ताकि यह असली लगे। हालांकि, जब इस दस्तावेज को पूरा पढ़ा गया, तो इसके अंत में ‘April Fool’ लिखा पाया गया। यह स्पष्ट है कि 1 अप्रैल के मौके पर किसी ने इसे प्रैंक के तौर पर बनाया था, जिसने बाद में अफवाह का रूप ले लिया।
सरकार का आधिकारिक स्पष्टीकरण
देश में लॉकडाउन की अटकलों पर विराम लगाते हुए केंद्र सरकार के मंत्रियों ने स्थिति साफ की है:
- निलमरा सीतारमण (वित्त मंत्री): उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में लॉकडाउन लगाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और जनता को घबराने की जरूरत नहीं है।
- हरदीप सिंह पुरी (पेट्रोलियम मंत्री): उन्होंने इन खबरों को ‘गैर-जिम्मेदाराना’ करार देते हुए कहा कि देश में ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति सामान्य रूप से जारी रहेगी।
- किरेन रिजिजू (संसदीय कार्य मंत्री): उन्होंने भी इन दावों को पूरी तरह भ्रामक बताया है।
PIB फैक्ट चेक की चेतावनी
सरकारी एजेंसी PIB Fact Check ने इस वायरल नोटिस और वीडियो को फर्जी करार दिया है, एजेंसी ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसी किसी भी अपुष्ट खबर को आगे फॉरवर्ड न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।
भारत में लॉकडाउन लगने की खबरें महज एक अफवाह और ‘अप्रैल फूल’ प्रैंक का हिस्सा हैं पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंकाओं को गलत तरीके से पेश किया गया था, जबकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि वे हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं और लॉकडाउन का कोई इरादा नहीं है।
















