
देश में स्पैम कॉल्स और फेक मैसेजेस (Spam Calls & Fake Messages) बढ़ते ही जा रहे हैं, और इसे रोकने के लिए टेलीकॉम रेगुलेटर TRAI (Telecom Regulatory Authority of India) ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव के तहत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI Based Spam Blocking) की मदद से संदिग्ध नंबरों को तुरंत ब्लॉक करने की व्यवस्था की जा सकती है। हालांकि, रिलायंस जियो (Reliance Jio) और एयरटेल (Airtel) जैसी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों ने इस प्रस्ताव को ‘रेड सिग्नल’ दिखाया है और इसे आम ग्राहकों के लिए जोखिमपूर्ण बताया है।
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AI पर भरोसा TRAI की नई सोच
हालांकि अभी तक किसी नंबर को ब्लॉक करने के लिए कम से कम पांच अलग-अलग शिकायतें (Complaints) 10 दिनों के अंदर TRAI को प्राप्त होनी जरूरी होती थीं, नए प्रस्ताव के मुताबिक ऐसा नहीं होगा। अब अगर किसी नंबर को AI सिस्टम लगातार 10 दिनों तक संभावित स्पैम नंबर के रूप में पहचानता है, तो बिना किसी इंसानी शिकायत के भी उस नंबर को ब्लॉक किया जा सकता है। TRAI का कहना है कि यह कदम स्पैम कॉल्स और फेक मैसेजेस को तुरंत रोकने के लिए जरूरी है। नियामक का तर्क है कि इस प्रक्रिया से यूजर्स को अनचाहे कॉल और मैसेजेस से तुरंत राहत मिलेगी।
कंपनियों की आपत्ति क्यों नहीं मान रहे AI पर भरोसा?
जियो और एयरटेल जैसी कंपनियों का कहना है कि केवल AI की मदद से किसी का नंबर ब्लॉक करना सही नहीं है। कंपनियों की चिंता मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर केंद्रित है:
- AI की गलती का खतरा: अगर AI सिस्टम में कोई तकनीकी या एल्गोरिदमिक त्रुटि हो जाती है, तो असली यूजर्स के नंबर भी ब्लॉक हो सकते हैं। इससे यूजर को बड़े पैमाने पर परेशानी होगी।
- नंबर रिस्टोर करना मुश्किल: एक बार नंबर ब्लॉक हो जाने पर उसे फिर से एक्टिव करने के लिए लंबी कागजी कार्यवाही (KYC और अन्य प्रोसिज़र) करनी पड़ सकती है। यह आम यूजर्स के लिए सिरदर्द बन सकता है।
- AI में असमानता: प्राइवेट कंपनियों के पास AI सिस्टम है, लेकिन सरकारी कंपनी BSNL (Bharat Sanchar Nigam Limited) के पास यह सुविधा नहीं है। साथ ही, अलग-अलग कंपनियों के AI पैरामीटर्स भी अलग हैं, जिससे सभी पर समान रूप से लागू करना मुश्किल है।
कंपनियों का समाधान AI नहीं, नियमन जरूरी
जियो, एयरटेल और Vi जैसी कंपनियों ने TRAI को सुझाव दिया है कि स्पैम कॉल्स और मैसेजेस पर नियंत्रण के लिए AI पर भरोसा करने की बजाय मुख्य समस्याओं को हल करने पर ध्यान दिया जाए। उनके अनुसार समाधान निम्नलिखित हो सकते हैं:
- कमर्शियल कॉल्स के लिए अलग नंबर सीरीज: टेलीकॉम कंपनियों को कमर्शियल कॉल्स के लिए अलग नंबर श्रृंखला जारी करनी चाहिए, जिससे आम यूजर्स के व्यक्तिगत नंबर सुरक्षित रहें।
- टेलीमार्केटर्स की जवाबदेही तय करना: स्पैम कॉल्स करने वाले टेलीमार्केटर्स के खिलाफ जवाबदेही तय करनी चाहिए।
- शिकायत प्रणाली का सुधार: AI की बजाय इंसानी शिकायतों और पारदर्शी निगरानी से ही नंबर ब्लॉकिंग का निर्णय लेना सुरक्षित रहेगा।
TRAI का अंतिम फैसला
TRAI फिलहाल इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक और कंपनियों के सुझावों का विश्लेषण कर रहा है। नियामक का उद्देश्य स्पष्ट है: स्पैम कॉल्स और मैसेजेस से यूजर्स को बचाना। लेकिन यह भी साफ है कि AI आधारित नंबर ब्लॉकिंग की प्रक्रिया लागू होने पर आम यूजर्स को तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर AI आधारित सिस्टम में कोई त्रुटि हुई, तो नंबर रिकवर करना लंबी प्रक्रिया हो सकती है। इसलिए इस मामले में संतुलन बनाना TRAI के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।
















