
नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी है केंद्र सरकार ने टोल टैक्स (Toll Tax) के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए यात्रियों को बड़ी राहत दी है, अब आधे-अधूरे एक्सप्रेसवे पर सफर करने के लिए आपको अपनी जेब ज्यादा ढीली नहीं करनी होगी।
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क्या है नया नियम?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने नेशनल हाईवे फीस (दर निर्धारण और वसूली) नियम, 2008 में बड़ा संशोधन किया है, नए नियमों के मुताबिक, जब तक कोई एक्सप्रेसवे पूरी तरह (End-to-End) बनकर तैयार नहीं हो जाता, तब तक उसके चालू हिस्सों पर यात्रियों से ‘प्रीमियम टोल’ नहीं वसूला जाएगा।
अभी तक नियम यह था कि एक्सप्रेसवे पर सामान्य नेशनल हाईवे के मुकाबले 25% ज्यादा टोल देना पड़ता था, लेकिन अब सरकार ने साफ कर दिया है कि अधूरा काम होने पर यात्रियों से यह अतिरिक्त 25% चार्ज नहीं लिया जाएगा, उन्हें केवल सामान्य हाईवे वाली दरों पर ही भुगतान करना होगा।
इन यात्रियों को भी मिलेगा बड़ा फायदा
सिर्फ अधूरे एक्सप्रेसवे ही नहीं, बल्कि हाईवे चौड़ीकरण के काम के दौरान भी टोल में भारी छूट का प्रावधान किया गया है:
- 2 से 4 लेन विस्तार: अगर किसी हाईवे को दो लेन से चार लेन का बनाया जा रहा है, तो निर्माण कार्य के दौरान टोल में 70% की कटौती की जाएगी। यानी यात्रियों को सिर्फ 30% टोल देना होगा।
- 4 से 6/8 लेन विस्तार: इसी तरह, चार लेन वाले हाईवे को छह या आठ लेन में बदलने के दौरान टोल दरों में 25% की छूट मिलेगी।
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कब से लागू होंगे नियम?
मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, ये नए नियम 15 फरवरी 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगे, यह रियायती दर एक साल की अवधि तक या एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने तक (जो भी पहले हो) लागू रहेगी।
सरकार का क्या है मकसद?
सरकार का उद्देश्य इन रियायतों के जरिए अधूरे एक्सप्रेसवे के चालू हिस्सों पर ट्रैफिक बढ़ाना है, इससे पुराने और भीड़भाड़ वाले नेशनल हाईवे पर दबाव कम होगा, यात्रियों का समय बचेगा और ईंधन की खपत में भी कमी आएगी।
















