
किचन हो या बेडरूम, अगर आपका घर ‘टॉप फ्लोर’ पर है, तो दोपहर होते-होते कमरा भट्टी की तरह तपने लगता है, अक्सर लोग राहत पाने के लिए छत पर पानी डालते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह बड़ी गलती है, छत पर पानी डालने से कंक्रीट में दरारें आ सकती हैं और कमरे के अंदर उमस (Humidity) का स्तर बढ़ जाता है, जिससे बेचैनी और अधिक होती है।
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छत पर कराएं ‘व्हाइट कूल रूफ कोटिंग’
गर्मी रोकने का सबसे असरदार तरीका है छत पर सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट या चूने का लेप लगाना सफेद रंग सूरज की किरणों को सोखने के बजाय रिफ्लेक्ट कर देता है, इससे छत का तापमान काफी कम रहता है और नीचे के कमरों में गर्मी का अहसास 5-8 डिग्री तक कम हो जाता है।
टेरेस गार्डनिंग का लें सहारा
छत पर रखे मिट्टी के गमले और पौधे एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच (Insulation) की तरह काम करते हैं, अगर आप पूरी छत पर टेरेस गार्डन बनाते हैं, तो मिट्टी सूरज की सीधी धूप को लैंटर तक नहीं पहुंचने देती। इससे कमरा ठंडा रहता है और आपको ताजी हवा भी मिलती है।
‘क्रॉस वेंटिलेशन’ की तकनीक अपनाएं
दोपहर के समय खिड़कियां और भारी पर्दे बंद रखें ताकि बाहर की लू अंदर न आए, सूरज ढलते ही घर के खिड़की-दरवाजे खोल दें और एग्जॉस्ट फैन चलाएं। इससे घर के अंदर फंसी गर्म हवा बाहर निकल जाएगी और ठंडी हवा का संचार होगा।
छत पर पानी डालकर केवल कुछ मिनटों की राहत मिलती है, लेकिन लंबे समय में यह आपकी छत और दीवार की मजबूती के लिए घातक हो सकता है।
















