आज 14 मार्च 2026 को देशभर के तेल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें ज़्यादा तेजी से बढ़ने की बजाय ज्यादा स्थिर दिख रही हैं। बड़े शहरों के अलावा छोटे नगरों जैसे मेरठ में भी वाहन ईंधन की कीमतें अब उतार‑चढ़ाव के बजाय एक तंग रेंज में टिकी हुई हैं। इस दौरान पंप पर आम उपभोक्ता को न तो बड़ी राहत मिली है और न ही अचानक महंगाई का झटका, बल्कि कीमतों में छोटी‑छोटी झिझक झलक रही है।

दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 94.7 रुपये प्रति लीटर और डीजल करीब 87.6 रुपये प्रति लीटर पर दर्ज है। मुंबई में पेट्रोल 103.5 से 104.2 रुपये और डीजल 90 से 92 रुपये के बीच बना हुआ है, जबकि कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी यही रुझान दिख रहा है। इन शहरों में रोज़ कीमत में ज़्यादा‑से‑ज़्यादा 0.1 से 0.7 रुपये का उतार‑चढ़ाव दिखता है, जो बड़ी बात नहीं, लेकिन नज़र ज़रूर रखने लायक है।
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शहरवार पेट्रोल-डीजल का हाल
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर, तुलनात्मक) | डीजल (₹/लीटर, तुलनात्मक) |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | लगभग 94.7 रुपये | लगभग 87.6 रुपये |
| मुंबई | 103.5-104.2 रुपये | 90-92 रुपये |
| कोलकाता | लगभग 105.4 रुपये | लगभग 92.0 रुपये |
| चेन्नई | लगभग 100.9 रुपये | लगभग 92.5 रुपये |
| बेंगलुरु | लगभग 103.0 रुपये | लगभग 91.0 रुपये |
| मेरठ | 94.3-94.7 रुपये | 87.4-87.8 रुपये |
मेरठ में पेट्रोल-डीजल का अंदरखानी आंकड़ा
मेरठ जैसे छोटे शहरों में हाल के तीन‑चार दिनों के दौरान पेट्रोल की कीमत 94.3 से 94.7 रुपये प्रति लीटर के बीच उतार‑चढ़ाव में रही है। हालांकि कुछ दिन पहले पेट्रोल 94.68 रुपये तक फिसल गया, जो उससे एक दिन पहले की तुलना में 0.3 रुपये ज़्यादा रहा, लेकिन यह बढ़ोत्तरी अब फिर से स्थिर दाम के साथ थम गई है। दूसरी ओर डीजल की कीमत मेरठ में 87.4 से 87.8 रुपये प्रति लीटर के बीच धीरे‑धीरे गिरकर टिकी हुई है, जिससे यातायात और लॉजिस्टिक सेक्टर को थोड़ी राहत मिली है।
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वैश्विक मंदी और भारतीय बाजार पर असर
देश के अन्य बड़े शहरों में भी रुझान यही है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की मामूली स्थिरता और रुपया-डॉलर के आसपास के उतार‑चढ़ाव के कारण कीमतों में बड़ी उछाल नहीं दिख रही। इसके अलावा राज्य और केंद्र के टैक्स ढांचे में बड़ी बदलाव की गुंजाइश नहीं होने की वजह से पंप‑मूल्य अधिकतर शहरों में एक‑दूसरे के करीब रहते हैं।
वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी की आशंकाएं और कम ग्रोथ दर के असर से तेल की मांग धीमी पड़ी है, जिसकी वजह से कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें कई महीनों से निचले स्तर पर बनी हुई हैं। इसका असर भारत में इतना तेज़ नहीं दिख रहा, लेकिन यह कमी ने कम से कम यह गारंटी दे दी है कि तेल की कीमतें अचानक ऐतिहासिक उच्च स्तर पर नहीं जा रहीं।
आम उपभोक्ता की जेब पर क्या असर?
इसका फायदा ट्रक, बस, रेल लॉजिस्टिक और डिलीवरी सेक्टर को तो मिल रहा है, लेकिन यह बचत अभी तक ज़्यादातर यात्रियों और आम उपभोक्ता के बजट तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है। कई विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह तंत्र लगातार स्थिर रहा तो आने वाले कुछ हफ्तों में डीजल पर आधारित सेक्टर और ट्रांसपोर्ट बिल में थोड़ी‑सी राहत दिख सकती है।
लेकिन जब तक राज्य और केंद्र के टैक्स ढांचे में मोटा बदलाव नहीं होता, तब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़े अंतर या ठोस राहत देखना मुश्किल है। इस बीच आम उपभोक्ता को यही उम्मीद बनाए रखना पड़ रहा है कि कीमतें अब ऊपर तो न जाएं, और थोड़ी‑सी गिरावट रोज़मर्रा के खर्च में राहत बना दे।
















