
सीबीएसई (CBSE) ने 2026 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जिससे अब केवल एडिशनल सब्जेक्ट के भरोसे पास होना मुमकिन नहीं होगा बोर्ड ने इंटरनल असेसमेंट और उपस्थिति को लेकर सख्ती बढ़ा दी है।
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इंटरनल असेसमेंट अब अनिवार्य
अगर कोई छात्र स्कूल के प्रोजेक्ट, प्रैक्टिकल, असाइनमेंट या आंतरिक टेस्ट में शामिल नहीं होता है, तो उसका रिजल्ट घोषित नहीं किया जाएगा ऐसे छात्रों को ‘एसेंशियल रिपीट’ (Essential Repeat) की श्रेणी में डाल दिया जाएगा, जिसका मतलब है कि उन्हें पूरा साल दोहराना होगा।
एडिशनल सब्जेक्ट के नियम बदले
- प्राइवेट छात्र: अब प्राइवेट उम्मीदवार एडिशनल सब्जेक्ट नहीं चुन पाएंगे, वे केवल उन्हीं विषयों की परीक्षा दे सकेंगे जिनमें वे फेल हुए हैं।
- नियमित छात्र: 10वीं के छात्र अधिकतम 2 और 12वीं के छात्र 1 एडिशनल सब्जेक्ट ले सकते हैं, बशर्ते उन्होंने इसकी 2 साल नियमित पढ़ाई की हो और स्कूल में उस विषय के शिक्षक व लैब उपलब्ध हों।
75% उपस्थिति की शर्त
परीक्षा में बैठने के लिए 75% अटेंडेंस होना अनिवार्य है। यदि छात्र की उपस्थिति कम रहती है, तो उसे बोर्ड परीक्षा से वंचित किया जा सकता है।
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पासिंग क्राइटेरिया और रिप्लेसमेंट
- सब्जेक्ट रिप्लेसमेंट: यदि छात्र मुख्य विषय (जैसे गणित या विज्ञान) में फेल होता है, तो वह स्किल सब्जेक्ट (एडिशनल) से रिप्लेस हो सकता है, लेकिन यह तभी होगा जब छात्र ने इंटरनल असेसमेंट की शर्तें पूरी की हों।
- 12वीं के लिए नियम: कक्षा 12वीं के छात्रों को थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों में अलग-अलग 33% अंक लाना अनिवार्य है।
दो बार बोर्ड परीक्षा (2026 से)
2026 से 10वीं के छात्रों के लिए साल में दो बार परीक्षा का विकल्प होगा। हालांकि, पहली मुख्य परीक्षा देना अनिवार्य है, यदि कोई छात्र पहली परीक्षा के 3 या अधिक विषयों में अनुपस्थित रहता है, तो वह दूसरी परीक्षा नहीं दे पाएगा।
















