यरुशलम की पवित्र अल-अक्सा मस्जिद एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन गई है। पाकिस्तान, सऊदी अरब, जॉर्डन और तुर्की जैसे आठ प्रमुख मुस्लिम देशों ने इजरायल के खिलाफ एकजुट होकर कड़ा रुख अपनाया है। फरवरी के अंत में जारी संयुक्त बयान में इजरायल की वेस्ट बैंक में बढ़ती गतिविधियों को क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा बताया गया। इन देशों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अल-अक्सा परिसर की यथास्थिति बिगाड़ने की कोई कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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अल-अक्सा का ऐतिहासिक महत्व
मुसलमानों के लिए तीसरा सबसे पवित्र स्थल अल-अक्सा मस्जिद यरुशलम के पुराने शहर में स्थित है। जॉर्डन इस परिसर का आधिकारिक संरक्षक है और गैर-मुस्लिमों को यहां प्रार्थना करने की इजाजत सख्ती से वर्जित है। वर्षों से यह जगह यहूदियों और फिलिस्तीनियों के बीच टकराव का प्रतीक बनी हुई है। इजरायली चरमपंथी नेताओं के बार-बार दौरे भावनाओं को भड़काते हैं, जिससे हिंसक झड़पें भड़क उठती हैं। हाल के महीनों में वेस्ट बैंक पर कथित अतिक्रमण ने मुस्लिम जगत को उकसा दिया। सऊदी अरब ने इसे धार्मिक अपमान करार दिया, जबकि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इजरायल को ललकारा।
आठ देशों का संयुक्त मोर्चा
इस बयान में शामिल देशों ने इजरायल से तत्काल कदम पीछे हटाने की मांग की। सऊदी ने क्षेत्रीय स्थिरता पर असर की बात कही, जॉर्डन ने मस्जिद प्रबंधन पर हस्तक्षेप का विरोध जताया। तुर्की, मिस्र, कतर, ओमान और यूएई ने भी समर्थन दिया। ईरान ने पर्दे के पीछे से समर्थन जताते हुए तनाव को और गहरा दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एकजुटता लंबे समय बाद मुस्लिम देशों की मजबूत आवाज है। यदि इजरायल ने अनदेखी की, तो व्यापक संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
तनाव की जड़ें और वर्तमान हालात
यह विवाद केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और भू-रणनीतिक भी है। अल-अक्सा यहूदियों के लिए टेम्पल माउंट के नाम से जाना जाता है, जो प्राचीन मंदिर स्थल माना जाता है। इजरायल का दावा है कि वह यथास्थिति का पालन कर रहा, लेकिन फिलिस्तीनी इलाकों में बढ़ते तनाव इसके उलट बयान देते हैं। यरुशलम में सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें तेज हो गई हैं। वैश्विक शक्तियां चुप्पी साधे हैं, लेकिन इस्लामिक सहयोग संगठन सक्रिय हो चुका।
भविष्य की आशंकाएं
यह संकट मध्य पूर्व की नाजुक शांति को खतरे में डाल सकता है। तेल उत्पादक देशों की चेतावनी से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने का डर है। भारत जैसे देशों को भी ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना होगा। क्या कूटनीति कामयाब होगी या नया युद्ध छिड़ेगा, यह आने वाले हफ्तों में साफ होगा। अल-अक्सा पर नजरें टिकी हैं।
















