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पश्चिम बंगाल में क्या लगेगा राष्ट्रपति शासन? चुनाव आयोग की बड़ी बैठक के बाद आई ये खबर, जानें क्या हैं चुनावी समीकरण

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों (West Bengal Assembly Elections 2026) को लेकर सियासी पारा अपने चरम पर है, हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई चुनाव आयोग की 'फुल बेंच' बैठक ने राज्य में प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज कर दी है, जहां एक ओर विपक्षी दल कानून-व्यवस्था का हवाला देकर राष्ट्रपति शासन की मांग कर रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग ने हिंसा मुक्त मतदान सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है

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पश्चिम बंगाल में क्या लगेगा राष्ट्रपति शासन? चुनाव आयोग की बड़ी बैठक के बाद आई ये खबर, जानें क्या हैं चुनावी समीकरण
पश्चिम बंगाल में क्या लगेगा राष्ट्रपति शासन? चुनाव आयोग की बड़ी बैठक के बाद आई ये खबर, जानें क्या हैं चुनावी समीकरण

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों (West Bengal Assembly Elections 2026) को लेकर सियासी पारा अपने चरम पर है, हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई चुनाव आयोग की ‘फुल बेंच’ बैठक ने राज्य में प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज कर दी है, जहां एक ओर विपक्षी दल कानून-व्यवस्था का हवाला देकर राष्ट्रपति शासन की मांग कर रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग ने हिंसा मुक्त मतदान सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है। 

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चुनाव आयोग की बैठक के मुख्य बिंदु

कोलकाता में दो दिनों तक चली उच्च स्तरीय बैठकों के बाद चुनाव आयोग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इस बार का चुनाव बेहद सख्त सुरक्षा घेरे में होगा: 

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साफ कर दिया है कि चुनाव पूर्व या चुनाव के बाद किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
  •  आयोग ने आश्वासन दिया है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा। मतदाता सूची (Electoral Rolls) की शुद्धता आयोग की प्राथमिकता है।
  •  बंगाल में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों (Central Forces) को तैनात किया जा रहा है, जिन्हें 14 मार्च तक अपना ‘रूट मार्च’ और एरिया डोमिनेशन पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
  • पारदर्शिता के लिए राज्य के सभी मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग की जाएगी।

क्या बंगाल में लगेगा राष्ट्रपति शासन?

राज्य में राष्ट्रपति शासन (Article 356) को लेकर अटकलें तब तेज हुईं जब भाजपा के कुछ नेताओं ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए इसकी मांग उठाई। 

  • विपक्ष का तर्क: भाजपा और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन में निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है।
  • सत्तारुढ़ दल का रुख: ममता बनर्जी और TMC नेताओं ने इन चर्चाओं को “साजिश” करार दिया है, उनका कहना है कि लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है।
  • विशेषज्ञों की राय: जानकारों का मानना है कि चुनाव की तारीखें नजदीक होने के कारण वर्तमान में राष्ट्रपति शासन की संभावना कम है, क्योंकि चुनाव आयोग खुद ही प्रशासन पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।

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बदले हुए चुनावी समीकरण

इस बार के चुनाव में कई नए समीकरण देखने को मिल रहे हैं:

  • राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस के अचानक इस्तीफे और नए राज्यपाल आर.एन. रवि की नियुक्ति ने सियासी बहस को नया मोड़ दे दिया है।
  •  भाजपा ने तीन चरणों में चुनाव कराने की मांग की है, जबकि अंतिम निर्णय चुनाव आयोग दिल्ली लौटने के बाद कानून-व्यवस्था की समीक्षा के आधार पर लेगा।
  •  मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच चुका है, जिससे राजनीतिक दलों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

चुनाव आयोग की इस सक्रियता और अधिकारियों को दिए गए कड़े निर्देशों (जैसे लंबित वारंट तामील करना) से यह साफ है कि आगामी चुनाव में प्रशासन की हर गतिविधि पर दिल्ली की पैनी नजर होगी, अब देखना यह है कि आयोग की ये सख्ती चुनाव को कितना शांतिपूर्ण बना पाती है।

West Bengal News in Hindi Will West Bengal Elections be Held Under Presidents Rule
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info@ortpsa.in

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