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इंटरनेट की छुट्टी! अब बिना सिम कार्ड और डेटा पैक के चलेंगे सारे मोबाइल ऐप्स; सरकार की ‘D2M’ तकनीक का बड़ा धमाका

स्मार्टफोन यूजर्स के लिए एक क्रांतिकारी खबर सामने आ रही है जल्द ही आपको अपने फोन पर लाइव वीडियो, मैच और फिल्में देखने के लिए महंगे डेटा पैक या सिम कार्ड की जरुरत नहीं पड़ेगी भारत सरकार की नई 'डायरेक्ट-टू-मोबाइल' (D2M) तकनीक देश में डिजिटल मनोरंजन का चेहरा बदलने के लिए तैयार है

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इंटरनेट की छुट्टी! अब बिना सिम कार्ड और डेटा पैक के चलेंगे सारे मोबाइल ऐप्स; सरकार की 'D2M' तकनीक का बड़ा धमाका
इंटरनेट की छुट्टी! अब बिना सिम कार्ड और डेटा पैक के चलेंगे सारे मोबाइल ऐप्स; सरकार की ‘D2M’ तकनीक का बड़ा धमाका

स्मार्टफोन यूजर्स के लिए एक क्रांतिकारी खबर सामने आ रही है जल्द ही आपको अपने फोन पर लाइव वीडियो, मैच और फिल्में देखने के लिए महंगे डेटा पैक या सिम कार्ड की जरुरत नहीं पड़ेगी भारत सरकार की नई ‘डायरेक्ट-टू-मोबाइल’ (D2M) तकनीक देश में डिजिटल मनोरंजन का चेहरा बदलने के लिए तैयार है।

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क्या है D2M तकनीक?

D2M यानी ‘डायरेक्ट-टू-मोबाइल’ तकनीक ठीक उसी तरह काम करती है जैसे आपके घर का एफएम रेडियो या डीटीएच (DTH) सिस्टम। इसमें ब्रॉडकास्ट सिग्नल सीधे आपके मोबाइल तक पहुंचेंगे इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि भीड़-भाड़ वाले इलाकों में भी वीडियो बिना रुके (Buffering) चलेगा और इसके लिए इंटरनेट का एक रुपया भी खर्च नहीं करना होगा।

सस्ते फोन और स्वदेशी चिपसेट का दम

इस तकनीक को आम जनता तक पहुंचाने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। लावा (Lava) और HMD जैसी दिग्गज कंपनियां मात्र 2000 से 2500 रुपये की रेंज में D2M इनेबल्ड फीचर फोन लाने की तैयारी में हैं, इन फोनों की सबसे खास बात यह है कि इनमें भारत में ही विकसित ‘संख्या लैब्स’ की SL3000 चिपसेट का इस्तेमाल किया जाएगा, जो पूरी तरह स्वदेशी है।

पुराने फोन के लिए खास ‘डोंगल’

अगर आप नया फोन नहीं खरीदना चाहते, तो चिंता की बात नहीं है, पुराने स्मार्टफोन यूजर्स के लिए बाजार में 500-600 रुपये की कीमत वाला एक छोटा डोंगल उपलब्ध कराया जाएगा, इसे फोन में लगाकर आप बिना सिम कार्ड के भी लाइव कंटेंट का आनंद ले सकेंगे।

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कब से शुरू होगी सेवा?

ताजा अपडेट के अनुसार, सरकार ने इसके लिए जरूरी फ्रीक्वेंसी बैंड (470–582 MHz) को हरी झंडी दे दी है, दिल्ली और बेंगलुरु समेत देश के 19 शहरों में इसका सफल ट्रायल पूरा हो चुका है, उम्मीद जताई जा रही है कि 2026 के मध्य तक यह तकनीक पूरे देश में रोलआउट कर दी जाएगी और व्यावसायिक सेवाएं 2026 के अंत तक शुरु हो जाएंगी।

इमर्जेंसी में बनेगा ‘लाइफलाइन’

मनोरंजन के अलावा यह तकनीक राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए भी अहम है, नेटवर्क गायब होने या इंटरनेट शटडाउन की स्थिति में भी सरकार इसके जरिए नागरिकों तक सीधे इमरजेंसी अलर्ट और जरूरी सूचनाएं पहुंचा सकेगी।

Govt Sim Binding Relief for Non Communication Apps
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info@ortpsa.in

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