
उत्तर भारत सहित देश के कई हिस्सों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा रहा है, ऐसे में कार का एसी (AC) कई बार फेल नजर आता है और केबिन को ठंडा करने में पसीने छूट जाते हैं, अक्सर लोग मैकेनिक के पास जाकर केवल गैस टॉप-अप करवा लेते हैं, लेकिन असली समस्या कहीं और होती है।
यह भी देखें: क्या पेट्रोल-डीजल खत्म होने वाला है ! IOCL-BPCL ने देश को दिया भरोसा, कोई कमी नहीं; पैनिक बाइंग से बचें
Table of Contents
केबिन फिल्टर का ‘कायाकल्प’ है जरुरी
कार की कूलिंग कम होने का सबसे बड़ा कारण केबिन (AC) फिल्टर में जमी गंदगी होती है यह फिल्टर बाहरी हवा से धूल और मिट्टी को अंदर आने से रोकता है।
- न्यूज टिप: सर्विस के दौरान मैकेनिक से फिल्टर को एयर प्रेशर से साफ करवाएं। यदि फिल्टर काफी पुराना हो चुका है, तो इसे बदलवाना ही समझदारी है। साफ फिल्टर एयरफ्लो को 50% तक बढ़ा देता है।
कंडेंसर की ‘वॉटर वॉश’ सफाई
कंडेंसर कार के फ्रंट ग्रिल के ठीक पीछे होता है, इसका काम केबिन की गर्मी को बाहर फेंकना है सड़क की धूल और कीचड़ कंडेंसर की जाली में फंस जाते हैं, जिससे इसकी हीट एक्सचेंज करने की क्षमता घट जाती है।
- मैकेनिक सीक्रेट: केवल गैस चेक करने से काम नहीं चलेगा। मैकेनिक से कहकर कंडेंसर पर हाई-प्रेशर वॉटर स्प्रे करवाएं इससे जाली खुल जाएगी और कंप्रेसर पर लोड कम पड़ेगा, जिससे माइलेज भी बेहतर होगा।
कूलिंग कॉइल (इवैपोरेटर) का फोम ट्रीटमेंट
डैशबोर्ड के अंदर स्थित कूलिंग कॉइल पर समय के साथ फंगस और धूल की परत जम जाती है इससे न केवल कूलिंग कम होती है, बल्कि एसी चलाने पर अजीब सी बदबू भी आती है।
- प्रो-एडवाइस: सर्विस के समय ‘एंटी-बैक्टीरियल फोम’ से कूलिंग कॉइल की सफाई करवाएं यह बिना डैशबोर्ड खोले कॉइल की गहराई से सफाई कर देता है और कूलिंग को नए जैसा बना देता है।
















