
सोशल मीडिया पर हाल ही में एक चौंकाने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति अपनी गाड़ी पर रखी 1,000 लीटर की प्लास्टिक वाली पानी की टंकी में सीधे पेट्रोल पंप से डीजल भरवाते नजर आ रहा है, इस वीडियो ने इंटरनेट पर बहस छेड़ दी है कि क्या इतनी बड़ी मात्रा में ईंधन का भंडारण करना सुरक्षित और कानूनी है।
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क्या है वायरल वीडियो का सच?
- यह वीडियो पंजाब के लुधियाना और गुरदासपुर जैसे इलाकों का बताया जा रहा है।
- मार्च 2026 की शुरुआत में मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में भारी उछाल की अफवाहों के चलते लोगों ने “पैनिक बाइंग” शुरू कर दी।
- विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि प्लास्टिक की टंकियों में ईंधन का भंडारण करना बेहद खतरनाक है क्योंकि पेट्रोल-डीजल अत्यधिक ज्वलनशील होते हैं और घर्षण या गर्मी से बड़े विस्फोट का कारण बन सकते हैं।
भारत में पेट्रोल-डीजल रखने के क्या हैं कानूनी नियम?
भारत में पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 और पेट्रोलियम नियम, 2002 के तहत ईंधन के भंडारण की सीमाएं तय की गई हैं:
- पेट्रोल (Petroleum Class A):
- बिना लाइसेंस के अधिकतम 30 लीटर तक स्टोर किया जा सकता है।
- इसे धातु (अधिकतम 25 लीटर क्षमता) या कांच/मिट्टी (1 लीटर क्षमता) के सुरक्षित कंटेनर में रखना अनिवार्य है।
- डीजल (Petroleum Class B):
- बिना लाइसेंस के अधिकतम 2,500 लीटर तक स्टोर किया जा सकता है।
- शर्त: किसी भी एक कंटेनर या ड्रम की क्षमता 1,000 लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- व्यवसायिक उपयोग: यदि आप 2,500 लीटर से अधिक डीजल या 30 लीटर से अधिक पेट्रोल स्टोर करना चाहते हैं, तो PESO (Petroleum and Explosives Safety Organization) से लाइसेंस लेना अनिवार्य है।
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नियमों के उल्लंघन पर क्या होगी कार्रवाई?
अगर कोई व्यक्ति अवैध रूप से या असुरक्षित तरीके से ईंधन का भंडारण करता पाया जाता है, तो कानून के तहत सख्त सजा का प्रावधान है:
- पेट्रोलियम अधिनियम की धारा 23 के तहत जुर्माना और सजा हो सकती है।
- अवैध भंडारण और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने पर 2 साल तक की जेल का प्रावधान है।
किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और ईंधन का भंडारण केवल सुरक्षित और कानूनी रुप से मान्य तरीकों से ही करें।
















