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GDP New Rules: कल से बदल जाएगा देश की कमाई नापने का तरीका, क्या होगा असर?

27 फरवरी से भारत में GDP गणना बदलेगी! बेस ईयर 2022-23, डबल डिफ्लेशन से मैन्युफैक्चरिंग सटीक। GST, सर्वे डेटा से गिग इकॉनमी चमकेगी। IMF 'C' रेटिंग सुधार, RBI नीतियां मजबूत। ग्रोथ रेट ऊंची दिखेगी? आम आदमी को योजनाओं का सही लाभ। नई दौर की शुरुआत!

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GDP New Rules: कल से बदल जाएगा देश की कमाई नापने का तरीका, क्या होगा असर?

भारत सरकार देश की आर्थिक तरक्की को मापने का पूरा तरीका बदलने जा रही है। आगामी 27 फरवरी को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के नए आंकड़े जारी होंगे, जिसमें आधार वर्ष 2011-12 की जगह 2022-23 होगा। यह बदलाव अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर पेश करने के लिए आवश्यक है, क्योंकि पुराने फॉर्मूले में कोविड महामारी के बाद के डिजिटल बाजार और सेवा क्षेत्र के बदलावों की सही झलक नहीं मिल रही थी।

नई QNA सीरीज के मुख्य बदलाव

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने नई तिमाही राष्ट्रीय लेखा (QNA) सीरीज पेश की है। इसमें डबल डिफ्लेशन तकनीक अपनाई जाएगी, जो इनपुट और आउटपुट प्राइस को अलग-अलग एडजस्ट करेगी। प्रोपोर्शनल डेंटन मेथड से तिमाही डेटा को वार्षिक आंकड़ों से बेहतर जोड़ा जाएगा। MoSPI सचिव सौरभ गर्ग ने बताया कि GST डेटा, LLP रिटर्न्स, घरेलू खपत सर्वेक्षण और श्रम बल सर्वेक्षण जैसे आधुनिक स्रोतों का इस्तेमाल होगा। इससे अनौपचारिक क्षेत्र और गिग इकॉनमी के योगदान को सटीक मापा जा सकेगा।

संशोधन क्यों जरूरी था?

GST लागू होने और महामारी के कारण पुरानी सीरीज में देरी हुई। नवंबर 2025 में IMF ने भारत के राष्ट्रीय खातों को ‘C’ रेटिंग दी, जिसमें कार्यप्रणाली की कमियां बताईं। सरकार अब हर पांच साल में बेस ईयर अपडेट करने का लक्ष्य रखेगी। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में डबल डिफ्लेशन से कच्चे माल और तैयार माल के मूल्य अंतर को बारीकी से ट्रैक किया जाएगा, जो पुराने सिंगल डिफ्लेशन में विसंगति पैदा करता था। वाहन पंजीकरण, ईंधन खपत और उच्च-आवृत्ति GST डेटा से असंगठित क्षेत्र मजबूत होगा।

CPI और अन्य सीरीज का अपडेट

हाल ही में खुदरा महंगाई (CPI) का बेस ईयर 2024 कर दिया गया। इसी तर्ज पर GDP, CPI और IIP सीरीज अपडेट हो रही हैं। Q3 2025-26 के आंकड़े नई सीरीज में जारी होंगे, जबकि Q1-Q2 रिवाइज होंगे।

आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

अर्थशास्त्री डीके श्रीवास्तव (ईवाई इंडिया) का कहना है कि सेवा क्षेत्र का वजन बढ़ेगा, जिससे ग्रोथ रेट ऊंची दिख सकती है। अदिति नायर (इक्रा) के अनुसार, RBI को ब्याज दरें तय करने में सटीक डेटा मिलेगा, जो महंगाई नियंत्रण और ऋण दरों को प्रभावित करेगा। नीति-निर्माण मजबूत होगा, निवेश आकर्षित होगा। आम आदमी को सरकारी योजनाओं का बेहतर मूल्यांकन होगा, जैसे सब्सिडी और विकास दर से जुड़े लाभ। हालांकि, शुरुआती रिविजन से ग्रोथ में मामूली उतार-चढ़ाव दिख सकता है।

यह बदलाव भारत को ग्लोबल स्टैंडर्ड पर लाएगा, जहां डिजिटल अर्थव्यवस्था और रिन्यूएबल एनर्जी का सही प्रतिबिंब मिलेगा। कुल मिलाकर, नई GDP सीरीज विकास की नई गति सेट करेगी। 

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info@ortpsa.in

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