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सावधान! मौसम बदलते ही क्यों घेर लेती हैं सांस की बीमारियां? डॉक्टर की ये सलाह बचाएगी जान

मौसम बदलते ही सांस की बीमारियां क्यों घेर लेती हैं? विशेषज्ञ डॉ. आदित्य नाग बताते हैं- ठंडी, शुष्क हवा फेफड़ों की नमी छीन लेती है, वायरस आसानी से फैलते हैं। बच्चे, बुजुर्ग और अस्थमा मरीज सबसे ज्यादा खतरे में। लक्षण: खांसी, सांस फूलना। बचाव- मास्क, ह्यूमिडिफायर, हाइड्रेशन और टीकाकरण अपनाएं। जागरूक रहें, जान बचाएं!

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सावधान! मौसम बदलते ही क्यों घेर लेती हैं सांस की बीमारियां? डॉक्टर की ये सलाह बचाएगी जान

आपने कभी गौर किया है कि जैसे ही कड़ाके की सर्दी कम होने लगती है और मौसम करवट लेता है, अचानक खांसी-जुकाम और सांस की बीमारियों की बाढ़ सी आ जाती है? यह कोई इत्तेफाक नहीं। बदलते मौसम में तापमान, नमी और प्रदूषण के उतार-चढ़ाव से हमारी इम्यूनिटी कमजोर पड़ जाती है, जिससे श्वसन तंत्र संक्रमणों का शिकार हो जाता है। डॉ. आदित्य नाग, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ रेस्पिरेटरी मेडिसिन, NIIMS मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा बताते हैं, “सर्दियों में हवा का सूखापन फेफड़ों की सुरक्षात्मक नमी छीन लेता है, जिससे वायरस-बैक्टीरिया आसानी से हमला बोल देते हैं।”​

मौसम परिवर्तन का असर खासकर दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रदूषित इलाकों में ज्यादा देखा जाता है, जहां सर्दी खत्म होते ही धूल और PM2.5 कण हवा में घुल जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समय RSV वायरस, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के मामलों में 30-40% उछाल लाता है।​

संक्रमण का खतरा क्यों बढ़ता है?

सर्दियों के दौरान ठंडी, शुष्क हवा सांस नलिकाओं के प्रोटेक्टिव बैरियर को कमजोर कर देती है। सामान्यतः वायुमार्ग में मौजूद बलगम वायरस को फंसाकर बाहर फेंकता है, लेकिन हीटर-ब्लोअर से यह सूख जाता है। नतीजा? वायरस लंबे समय तक टिकते हैं और फैलते हैं। ठंडे मौसम में ये रेस्पिरेटरी वायरस जीवित रहते हैं, जबकि लोग बंद कमरों में इकट्ठा होते हैं, जिससे संक्रमण चेन बन जाती है।

\गर्मी-नमी बढ़ने पर फफूंद और परागकण एलर्जी ट्रिगर करते हैं, COPD और अस्थमा के मरीजों में सूजन बढ़ा देते हैं। प्रदूषण की भूमिका सबसे घातक है- PM2.5 कण फेफड़ों में जमा होकर ऑक्सीजन एक्सचेंज बाधित करते हैं।​

सबसे ज्यादा खतरे में कौन?

हर उम्र के लोग प्रभावित होते हैं, लेकिन जोखिम भरा ग्रुप अलग है। 10 साल से कम बच्चे, जिनका इम्यून सिस्टम अधूरा है, RSV और ब्रोंकाइटिस की चपेट में आते हैं। 65+ बुजुर्गों में डायबिटीज-हृदय रोग के साथ इम्यूनिटी कम होने से मामूली संक्रमण निमोनिया बन जाता है। अस्थमा-COPD वाले मरीजों के लिए तापमान उतार-चढ़ाव घातक है- वायुदाब बदलाव से सांस फूलना आम हो जाता है। शहरी निवासियों पर प्रदूषण दोहरा प्रहार करता है।​

लक्षणों को नजरअंदाज न करें

लगातार खांसी, बलगम, छींकें, सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न या थकान शुरुआती संकेत हैं। 2-3 दिन से ज्यादा रहें तो डॉक्टर से संपर्क करें, वरना गंभीर बीमारी हो सकती है।​​

बचाव के आसान उपाय अपनाएं

डॉक्टर आदित्य नाग और अन्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं:

  • हाइड्रेशन रखें: खूब पानी पिएं, सांस नलिकाओं में नमी बनी रहे।
  • ह्यूमिडिफायर यूज करें: हीटर के साथ कमरे में नमी बनाए रखें।
  • मास्क पहनें: N95 से धूल-प्रदूषण रोकें, खासकर सुबह-शाम।​
  • टीकाकरण: फ्लू-इन्फ्लूएंजा वैक्सीन लगवाएं, बुजुर्ग-बच्चों के लिए जरूरी।
  • लाइफस्टाइल: अदरक चाय, विटामिन C फल, प्राणायाम और एयर प्यूरीफायर अपनाएं। धूल से दूर रहें, व्यायाम करें।

डॉ. आशुतोष दुबे (श्याम प्रसाद मुखर्जी चिकित्सालय) कहते हैं, “मौसम बदलने से पहले दवा कोर्स पूरा करें, आउटडोर एक्टिविटी कम करें।” अस्थमा मरीज इनहेलर साथ रखें।​

Author
info@ortpsa.in

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