
सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक खबर तेजी से वायरल हो रही है कि अब हर UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा, करोड़ों यूजर्स इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि क्या अब उनकी जेब पर बोझ बढ़ने वाला है? इस मामले पर केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।
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क्या सच में लगेगा चार्ज?
सरकार और RBI ने साफ कर दिया है कि आम नागरिकों के लिए UPI ट्रांजेक्शन अभी भी पूरी तरह मुफ्त हैं।
- बैंक-टू-बैंक ट्रांसफर: यदि आप अपने बैंक अकाउंट से किसी दूसरे के बैंक अकाउंट में पैसे भेजते हैं (P2P), तो कोई शुल्क नहीं देना होगा。
- आम खरीदारी: दुकान पर QR कोड स्कैन करके पेमेंट करने पर भी ग्राहकों को कोई अतिरिक्त पैसा नहीं देना है。
फिर चार्ज की चर्चा क्यों? (मर्चेंट ट्रांजेक्शन का सच)
भ्रम की स्थिति तब पैदा हुई जब प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) जैसे वॉलेट के माध्यम से होने वाले ट्रांजेक्शन पर ‘इंटरचेंज फीस’ की बात आई।
- व्यापारियों के लिए नियम: केवल उन व्यापारियों पर 0.5% से 1.1% तक का शुल्क लागू होता है जो ₹2,000 से अधिक का पेमेंट वॉलेट या प्रीपेड कार्ड के जरिए स्वीकार करते हैं。
- ग्राहक को राहत: यह शुल्क दुकानदार के बैंक को देना होता है, ग्राहक को नहीं。
बजट 2026: डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा
सरकार ने डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए बजट 2026-27 में बड़ी घोषणा की है:
- ₹2,000 करोड़ का प्रोत्साहन: सरकार ने डिजिटल लेनदेन को मुफ्त बनाए रखने के लिए बैंकों और मर्चेंट्स को ₹2,000 करोड़ का इंसेंटिव देने का फैसला किया है。
- मुफ्त सेवा जारी रहेगी: वित्तीय सेवा सचिव ने स्पष्ट किया है कि सरकार UPI की लागत का बोझ खुद उठाएगी ताकि देश में कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा मिलता रहे。
ट्रांजेक्शन लिमिट में बड़े बदलाव (2026)
सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए कुछ श्रेणियों में लेनदेन की सीमा बढ़ाई गई है:
- सामान्य सीमा: आम यूजर्स के लिए दैनिक सीमा अभी भी ₹1 लाख है。
- शिक्षा और स्वास्थ्य: अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों को भुगतान के लिए सीमा बढ़ाकर ₹5 लाख प्रति ट्रांजेक्शन कर दी गई है。
- टैक्स और निवेश: कर भुगतान, बीमा और कैपिटल मार्केट निवेश के लिए दैनिक सीमा अब ₹10 लाख तक हो सकती है。
सुरक्षा के नए नियम
धोखाधड़ी रोकने के लिए 1 अक्टूबर 2025 से ‘पी-टू-पी कलेक्ट रिक्वेस्ट’ फीचर को बंद कर दिया गया था, साथ ही, अप्रैल 2026 से बड़े ट्रांजेक्शन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य किया जा रहा है।
यदि आप एक आम यूजर हैं और रोजमर्रा के कामों के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। UPI पूरी तरह फ्री है और सरकार का फिलहाल इस पर कोई टैक्स या चार्ज लगाने का इरादा नहीं है।
















