
भारतीय रेलवे में “ड्राइवर” को आधिकारिक तौर पर लोको पायलट (Loco Pilot) कहा जाता है, अगर आप इस पद पर करियर बनाना चाहते हैं, तो इसके लिए तय योग्यता, भर्ती प्रक्रिया और ट्रेनिंग को समझना जरूरी है।
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आवश्यक शैक्षिक योग्यता (Educational Qualification)
रेलवे में भर्ती की शुरुआत सीधे ‘ड्राइवर’ के रूप में नहीं, बल्कि असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के तौर पर होती है। इसके लिए आपके पास निम्नलिखित में से कोई एक योग्यता होनी चाहिए:
- ITI/डिप्लोमा: 10वीं पास होने के साथ संबंधित ट्रेड (जैसे- फिटर, इलेक्ट्रिशियन, डीजल मैकेनिक, वायरमैन आदि) में ITI प्रमाणपत्र।
- इंजीनियरिंग: मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स या ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में 3 साल का डिप्लोमा या B.E./B.Tech की डिग्री।
- शारीरिक मानक: आंखों की रोशनी 6/6 (बिना चश्मे के) होनी अनिवार्य है। इसे ‘A-1 मेडिकल स्टैंडर्ड’ कहा जाता है।
सैलरी स्ट्रक्चर (Salary & Earnings)
लोको पायलट की सैलरी उनके काम के घंटों और तय की गई दूरी (किलोमीटर) पर बहुत हद तक निर्भर करती है:
- शुरुआती वेतन: असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) का मूल वेतन ₹19,900 से शुरू होता है, लेकिन भत्तों को जोड़कर शुरुआती इन-हैंड सैलरी ₹35,000 से ₹45,000 के बीच रहती है।
- अनुभवी ड्राइवर: पदोन्नति के बाद जब आप मेल या एक्सप्रेस ट्रेन के लोको पायलट बनते हैं, तो वेतन ₹1,00,000 प्रति माह से भी ऊपर जा सकता है।
भत्ते और विशेष सुविधाएं (Perks & Benefits)
रेलवे अपने ड्राइवरों को वेतन के अलावा कई बेहतरीन सुविधाएं देता है:
- रनिंग अलाउंस (Running Allowance): यह ड्राइवर की कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा होता है, आप जितनी दूर ट्रेन चलाएंगे, प्रति किलोमीटर के हिसाब से उतना अधिक पैसा मिलेगा।
- आवास और चिकित्सा: रेलवे क्वार्टर की सुविधा और रेलवे अस्पतालों में पूरे परिवार के लिए मुफ्त इलाज।
- मुफ्त यात्रा (Railway Pass): स्वयं और परिवार के लिए पूरे भारत में कहीं भी आने-जाने के लिए फ्री या रियायती पास।
- अन्य भत्ते: नाइट ड्यूटी अलाउंस, त्यौहार भत्ता और बच्चों की पढ़ाई के लिए सब्सिडी।
चयन प्रक्रिया (Selection Process)
इसके लिए रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) समय-समय पर परीक्षा आयोजित करता है, जिसमें मुख्य रूप से तीन चरण होते हैं:
- CBT 1 & 2: कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा (गणित, विज्ञान, रीजनिंग और तकनीकी विषय)।
- CBAT (Psychological Test): मानसिक एकाग्रता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता की जांच।
- मेडिकल टेस्ट: सबसे कठिन चरण, जिसमें आंखों की गहन जांच की जाती है।
















