
बिल्ली का काटना या खरोंचना अक्सर लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, बिल्लियों के जरिए ‘कैट स्क्रैच डिजीज’ (CSD) फैलने का खतरा रहता है, जो शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है।
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क्या है ‘कैट स्क्रैच डिजीज’?
यह संक्रमण ‘बार्टोनेला हेंसेले’ (Bartonella henselae) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है, जब कोई संक्रमित बिल्ली किसी व्यक्ति को काटती है या जोर से खरोंच मारती है, तो उसकी लार या पंजों के जरिए यह बैक्टीरिया इंसान के खून में प्रवेश कर जाता है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
संक्रमण होने के कुछ दिनों बाद शरीर में ये बदलाव दिख सकते हैं:
- घाव पर उभार: जिस जगह बिल्ली ने काटा या खरोंचा है, वहां लाल दाने या मवाद वाले छाले पड़ना।
- लिम्फ नोड्स में सूजन: संक्रमण वाली जगह के पास की गांठों (जैसे गर्दन, बगल या कोहनी) में सूजन और तेज दर्द।
- लगातार बुखार: हल्का लेकिन लगातार बना रहने वाला बुखार और सिरदर्द।
- अत्यधिक थकान: बिना किसी मेहनत के शरीर में कमजोरी और थकान महसूस होना।
बिल्ली के हमले के तुरंत बाद ये कदम उठाएं
- तुरंत सफाई: घाव को बिना देरी किए साबुन और साफ पानी से कम से कम 10 मिनट तक धोएं।
- एंटीसेप्टिक: धोए हुए स्थान पर एंटीसेप्टिक क्रीम या लोशन लगाएं।
- मेडिकल परामर्श: डॉक्टर से मिलकर टिटनेस और रेबीज के टीके के बारे में बात करें। यदि बिल्ली आवारा है, तो खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
किसे है ज्यादा खतरा?
विशेषज्ञों के मुताबिक, छोटे बच्चों और उन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कम है, यदि समय पर इलाज न मिले, तो यह संक्रमण हड्डियों, जोड़ों और यहाँ तक कि आंखों को भी नुकसान पहुँचा सकता है।
















