
प्रॉपर्टी बाजार और किरायेदारी को लेकर सालों से चले आ रहे विवादों पर अब विराम लगने वाला है नए रेंट कानून (New Rent Act 2026) और हाई कोर्ट के ताजा फैसलों ने मकान मालिकों को बड़ी ताकत दे दी है, अब किरायेदार छोटी-मोटी तकनीकी खामियों या नोटिस की प्रक्रिया का बहाना बनाकर घर पर कब्जा नहीं जमा सकेंगे, अगर मकान मालिक को अपने निजी इस्तेमाल के लिए घर की जरूरत है, तो किरायेदार को घर खाली करना ही होगा।
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हाई कोर्ट का सख्त रुख: तकनीकी आपत्तियां अब नहीं चलेंगी
हाल ही में एक मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किरायेदार अक्सर बेदखली की प्रक्रिया को लंबा खींचने के लिए ‘नोटिस की अवधि’ या ‘प्रक्रियात्मक त्रुटियों’ का सहारा लेते हैं। अदालत ने साफ कर दिया कि यदि मकान मालिक की जरूरत ‘वास्तविक’ (Bonafide) है, तो केवल नोटिस में देरी या तकनीकी आधार पर बेदखली के आदेश को रोका नहीं जा सकता।
नए नियमों की 5 बड़ी बातें
- यदि रेंट एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी किरायेदार घर खाली नहीं करता है, तो मकान मालिक को पहले दो महीनों के लिए दोगुना किराया और उसके बाद चार गुना किराया वसूलने का कानूनी अधिकार होगा।
- अब किसी संपत्ति का कोई भी एक सह-मालिक (Co-owner) अकेले ही किरायेदार के खिलाफ बेदखली का मुकदमा दायर कर सकता है। इसके लिए उसे सभी मालिकों की सहमति की आवश्यकता नहीं होगी।
- नए कानून के तहत अब रेंट कोर्ट और ट्रिब्यूनल को 60 दिनों के भीतर विवादों को सुलझाने का लक्ष्य दिया गया है, इससे सालों तक चलने वाली अदालती कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी।
- मौखिक समझौतों की अब कोई कानूनी अहमियत नहीं रह गई है। 2026 के नियमों के अनुसार, हर किरायेदारी का लिखित और पंजीकृत (Registered) होना अनिवार्य है।
- जहाँ एक तरफ मालिकों को हक मिले हैं, वहीं कानून यह भी कहता है कि मकान मालिक किरायेदार को निकालने के लिए जबरन बिजली या पानी का कनेक्शन नहीं काट सकते। इसके लिए उन्हें कानूनी प्रक्रिया का ही सहारा लेना होगा।
किन स्थितियों में तुरंत खाली होगा घर?
- लगातार दो महीने तक किराया न देने पर।
- मकान मालिक द्वारा खुद के रहने के लिए घर की मांग करने पर।
- बिना अनुमति के घर के ढांचे में बदलाव करने या नुकसान पहुँचाने पर।
- किसी अन्य व्यक्ति को बिना बताए घर ‘सबलेट’ करने पर।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए नियमों से रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता आएगी और लोग अपने घर किराये पर देने से हिचकिचाएंगे नहीं अब “किरायेदार का कब्जा” जैसे डर गुजरे जमाने की बात होने वाले हैं।
















