
बिहार के बुनियादी ढांचे और सड़क नेटवर्क को लेकर एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है, राज्य के 21 जिलों में कनेक्टिविटी को विश्वस्तरीय बनाने के लिए 7 नए नेशनल हाईवे (NH) के निर्माण की बाधाएं अब दूर हो गई हैं, बिहार सरकार ने इन परियोजनाओं को गति देने के लिए जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) की प्रक्रिया को सरल और तेज करने का निर्णय लिया है।
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जमीन अधिग्रहण के लिए बनेगी विशेष कमेटी
नेशनल हाईवे परियोजनाओं में सबसे बड़ी अड़चन जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर आती है, इसे देखते हुए राज्य सरकार एक विशेष कमेटी (STF) और ‘काला’ (Competent Authority for Land Acquisition) का गठन करने जा रही है, यह कमेटी न केवल जमीन अधिग्रहण की निगरानी करेगी, बल्कि किसानों और भू-स्वामियों के साथ समन्वय स्थापित कर मुआवजे के वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।
इन 21 जिलों को मिलेगा सीधा लाभ
इस मेगा प्रोजेक्ट के दायरे में बिहार के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं, इनमें पटना, मोतिहारी, बेतिया, वैशाली, दरभंगा, समस्तीपुर, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, बेगूसराय, मुंगेर, लखीसराय, बांका, भोजपुर और रोहतास जिले शामिल हैं। इन हाईवे के बनने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच की दूरी कम होगी और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
समय सीमा और विकास का रोडमैप
पथ निर्माण विभाग के अनुसार, इन हाईवे के निर्माण से बिहार के सुदूर इलाकों को भी राजधानी पटना और पड़ोसी राज्यों से सीधे जोड़ा जा सकेगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2027 तक जमीन सर्वे और अधिग्रहण की मुख्य प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया जाए, ताकि निर्माण कार्य में कोई देरी न हो।
मुख्य आकर्षण
- ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे: पटना-पूर्णिया जैसे आधुनिक एक्सप्रेसवे के लिए भी जमीन अधिग्रहण तेज।
- मल्टी-डिपार्टमेंटल टीम: वन, बिजली और रेलवे विभागों के साथ मिलकर काम करेगी नई कमेटी।
- आर्थिक विकास: नए हाईवे के किनारे लॉजिस्टिक पार्क और उद्योगों के विकसित होने की संभावना।
बिहार में सड़कों का यह नया जाल न केवल सफर आसान बनाएगा, बल्कि राज्य की आर्थिक तस्वीर को भी पूरी तरह बदल देगा।
















