देशभर के सरकारी स्कूलों में वर्षों से पढ़ाने वाले शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है। टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को अनिवार्य करने के फैसले ने लाखों अनुभवी टीचरों को परेशान कर दिया है। संसद में इस मुद्दे पर जोरदार बहस हुई, जहां सांसदों ने पुराने शिक्षकों को राहत देने की मांग उठाई। केंद्र सरकार विचार कर रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं आया।

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सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने गैर-अल्पसंख्यक सरकारी और निजी स्कूलों में TET को शिक्षकों की योग्यता का आधार बना दिया। जिनकी सेवा में पांच साल से ज्यादा समय बाकी है, उन्हें यह परीक्षा पास करनी होगी। नौकरी या प्रमोशन पर असर पड़ सकता है, अगर TET क्लियर न हुआ। वहीं, जिनकी रिटायरमेंट करीब है यानी पांच साल से कम सेवा बची हो, उन्हें छूट मिल सकती है। इस फैसले से उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के करीब बारह लाख शिक्षक प्रभावित हुए हैं। ये टीचर बिना TET के दशकों से बच्चों को पढ़ाते आ रहे हैं।
राज्यसभा में गूंजा मुद्दा
संसद के ऊपरी सदन में भाजपा सांसद सीमा द्विवेदी ने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने बताया कि दो लाख से ज्यादा शिक्षक मानसिक तनाव में हैं। अनुभवी टीचरों पर नई परीक्षा का बोझ अन्यायपूर्ण है, क्योंकि उनका व्यावहारिक अनुभव ही सबसे बड़ा प्रमाण है। विपक्षी सदस्यों ने भी समर्थन दिया। सरकार ने जवाब में पुराने सरकारी शिक्षकों के हितों का ध्यान रखने का भरोसा दिया। मामला अब बड़ी बेंच के पास लंबित है।
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यूपीटीईटी पर स्थगन का असर
उत्तर प्रदेश में तीन साल बाद होने वाली TET परीक्षा को अचानक टाल दिया गया। इससे पंद्रह लाख अभ्यर्थी चिंतित हैं। आयोग की बैठक में यह निर्णय लिया गया, लेकिन नई तारीख का ऐलान नहीं हुआ। शिक्षक संगठन दबाव बना रहे हैं कि TET पास न करने पर रिटायरमेंट लाभ या वैकल्पिक राहत मिले। अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए अलग नियम बने रह सकते हैं।
राहत की उम्मीद जारी
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि RTE कानून TET को जरूरी बताता है, लेकिन अनुभवी शिक्षकों को छूट देना उचित होगा। केंद्र सरकार अब उन शिक्षकों पर विचार कर रही है, जो पहले से नौकरी में हैं। अगर छूट मिली, तो हजारों टीचरों को बड़ी राहत पहुंचेगी। यूनियनें धरनों और प्रदर्शनों से सरकार पर दबाव बढ़ा रही हैं।
फिलहाल TET अनिवार्य बना रहेगा। शिक्षकों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला तय करेगा कि भविष्य में क्या होगा। अनुभवी टीचरों का संघर्ष जारी है, और राहत की किरण दिख रही है।
















