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थर्ड पार्टी इंश्योरेंस को हल्के में न लें! मामूली बचत के चक्कर में हो सकती है जेल और भारी जुर्माना; जानें इसके बड़े फायदे

थर्ड पार्टी इंश्योरेंस न लें तो जेल और भारी जुर्माना हो सकता है। यह दूसरे को नुकसान की भरपाई करता है। सस्ता है, कानूनी सुरक्षा देता है। बिना इसके दुर्घटना में लाखों गंवा सकते हैं। हर गाड़ी मालिक जरूर करवाएं!

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देश में वाहनों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है, लेकिन कई लोग गाडी का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस नहीं कराते हैं। इसका कारण पैसे बचाने के चक्कर में अथवा सोचते हैं यह कराना जरुरी नहीं है। लेकिन बता दें यह बीमा हर गाड़ी के लिए कानूनन जरूरी है। बिना इसके न सिर्फ भारी जुर्माना और जेल का खतरा है, बल्कि दुर्घटना में लाखों रुपये का नुकसान भी हो सकता है। मामूली सालाना खर्च से बचने की कोशिश में लोग खुद को बड़े संकट में डाल लेते हैं।

थर्ड पार्टी इंश्योरेंस को हल्के में न लें! मामूली बचत के चक्कर में हो सकती है जेल और भारी जुर्माना; जानें इसके बड़े फायदे

थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का मतलब समझें

यह पॉलिसी आपकी गाड़ी से किसी दूसरे व्यक्ति को हुए नुकसान की पूरी जिम्मेदारी उठाती है। मान लीजिए आपकी बाइक या कार किसी राहगीर को टक्कर मार दे या सामने वाली गाड़ी को खरोंच आ जाए। अगर उस व्यक्ति को चोट लगे, उसकी जान चली जाए या उसकी संपत्ति बर्बाद हो जाए, तो बीमा कंपनी ही मुआवजा देगी। इसमें इलाज का खर्च, मौत की भरपाई, वकील की फीस और कोर्ट के दावों का बोझ शामिल होता है। लेकिन अपनी गाड़ी की मरम्मत, चोरी या ड्राइवर के मेडिकल बिल यह कवर नहीं करता। लंबी अवधि की पॉलिसी चुनें तो प्रीमियम सालों तक एक ही रहता है, महंगाई का डर नहीं।

बिना बीमा के क्या-क्या जोखिम हैं?

कानून साफ कहता है कि बिना वैध थर्ड पार्टी कवर के वाहन चलाना गैरकानूनी है। पहली बार पकड़े जाने पर दो हजार रुपये का चालान या तीन महीने की जेल हो सकती है। अगर दोबारा हो जाए तो चार हजार तक जुर्माना। कई जगह पेट्रोल पंप वाले भी बिना इंश्योरेंस वाले वाहन को ईंधन देने से मना कर देते हैं। दुर्घटना होने पर पीड़ित पक्ष सीधे आप पर केस ठोक सकता है। लाखों रुपये का मुआवजा खुद भरना पड़ सकता है, जो मध्यम वर्ग के लिए बर्बादी ला सकता है। देश में करोड़ों गाड़ियां ऐसी स्थिति में चल रही हैं, जिससे सड़क हादसों का ग्राफ बढ़ रहा है।

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इन फायदों को भूलें मत

सबसे बड़ा लाभ है कानूनी ढाल। छोटे से हादसे में भी कोर्ट कचहरी के चक्कर से मुक्ति मिलती है। कंपनी सब संभाल लेती है, आपको सिर्फ शांति। यह बेहद किफायती है, बाइक के लिए सालाना कुछ सौ रुपये और कार के लिए दो हजार तक। ऑनलाइन तुरंत खरीद या रिन्यू कर सकते हैं। कुछ प्लान में खुद के लिए दुर्घटना बीमा भी जोड़ सकते हैं। कुल मिलाकर, यह न सिर्फ पैसा बचाता है बल्कि तनाव से भी दूर रखता है।

कैसे सुनिश्चित करें बीमा?

नई गाड़ी लेते ही डीलर से करवा लें। पुरानी के लिए हर साल चेक करें। सरकारी पोर्टल या बैंक ऐप से आसानी से रिन्यू हो जाता है। ट्रैफिक पुलिस के अभियानों में फंसने से बचें। कम्प्रिहेंसिव पॉलिसी तो और बेहतर, लेकिन थर्ड पार्टी आधारभूत जरूरत है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। सड़कें सबकी हैं, जिम्मेदारी भी सबकी।

Author
info@ortpsa.in

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