उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रॉपर्टी रजिस्ट्री में क्रांतिकारी बदलाव कर दिया है। अब कोई भी जमीन तभी बिकेगी जब विक्रेता का नाम खतौनी रिकॉर्ड से पूरी तरह मेल खाएगा। इस फैसले से फर्जी दस्तावेजों के खेल पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। कैबिनेट की ताजा बैठक में स्वीकृत यह नियम राज्य भर में लाखों रजिस्ट्री प्रक्रियाओं को प्रभावित करेगा।

Table of Contents
नए नियम क्यों है ख़ास?
पहले रजिस्ट्री के लिए आधार या वोटर आईडी काफी थी लेकिन अब स्टाम्प विभाग हर आवेदन पर खतौनी नंबर की गहन जांच करेगा। नाम में मामूली अंतर भी रजिस्ट्री को रोक देगा। कृषि भूमि पर खास नजर रहेगी जहां ग्राम कोड सहित पूरी डिटेल दर्ज होगी। सभी पक्षकारों को मोबाइल पर OTP भेजा जाएगा और PAN की वैधता ऑनलाइन जांच होगी। गलत जानकारी मिलते ही प्रक्रिया रुक जाएगी।
आधार से जुड़ी सख्ती
फरवरी से ही आधार आधारित e-KYC बायोमेट्रिक जांच और डिजिटल हस्ताक्षर अनिवार्य हो चुके हैं। खरीदार विक्रेता और गवाह तीनों को वेरिफाई होना जरूरी। यह व्यवस्था जमीन हड़पने वाले गिरोहों को बेनकाब करेगी। एक ही प्लॉट की बार-बार बिक्री या नकली पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे हथकंडे अब नामुमकिन हो जाएंगे।
माफियाओं पर गहरा प्रहार
उत्तर प्रदेश में भू-माफिया सालों से फर्जी रिकॉर्ड बनाकर संपत्ति पर कब्जा करते रहे। इस नए सिस्टम से रीयल टाइम टाइटल जांच शुरू हो जाएगी। काले धन का इस्तेमाल कर कम वैल्यूएशन दिखाने की चालाकी भी बंद। विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे कोर्ट में लटके विवादों में कमी आएगी और बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी। निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा।
नागरिकों के लिए जरूरी सलाह
रजिस्ट्री से पहले भूलेख वेबसाइट पर अपना नाम सत्यापित करें। आधार को मोबाइल से लिंक रखें और बायोमेट्रिक डेटा अपडेट कराएं। सभी कागजात की प्रमाणिकता जांच लें। ग्रामीण क्षेत्रों में खास सावधानी बरतें जहां माफिया सक्रिय रहते हैं। यह कदम न केवल गरीब किसानों को बचाएगा बल्कि संपत्ति बाजार को मजबूत बनाएगा।
योगी सरकार का यह सुधार भूमि प्रबंधन में नया आयाम जोड़ेगा। फर्जीवाड़े की जड़ें उखड़ेंगी और सच्चे मालिकों का हक सुरक्षित रहेगा।
















