
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के शहरी गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए ‘अपना घर’ होने के सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है, 10 मार्च 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 को लेकर नई गाइडलाइन्स को मंजूरी दे दी गई है, इस फैसले से आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।
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अब ₹2.50 लाख की मिलेगी सीधी मदद
नई गाइडलाइन के अनुसार, योगी सरकार ने आवास निर्माण के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बना दिया है, अब EWS श्रेणी के मकानों के लिए कुल ₹2.50 लाख की सब्सिडी दी जाएगी, इसमें केंद्र सरकार का योगदान ₹1.50 लाख होगा, जबकि राज्य सरकार अपनी ओर से ₹1 लाख की सहायता राशि प्रदान करेगी।
मकानों का दायरा बढ़ा, लागत सीमा भी तय
शहरी विकास को नई ऊंचाई देने के लिए सरकार ने न केवल सहायता राशि बढ़ाई है, बल्कि मकानों के मानक में भी बदलाव किया है:
- बड़ा स्पेस: EWS मकानों का क्षेत्रफल बढ़ाकर अब 30 वर्ग मीटर कर दिया गया है।
- बजट सीमा: इन घरों की अधिकतम लागत ₹9 लाख तक सीमित की गई है, ताकि आम आदमी पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
- सरकारी छूट: रजिस्ट्री के दौरान लगने वाले स्टांप शुल्क में भारी छूट दी जाएगी। साथ ही, डेवलपर्स को प्रोत्साहित करने के लिए मैप और डेवलपमेंट शुल्क में भी रियायत का प्रावधान है।
किरायेदारों के लिए भी खुशखबरी (ARH योजना)
योगी सरकार ने उन लोगों का भी ध्यान रखा है जो अभी घर खरीदने की स्थिति में नहीं हैं, नई नीति के तहत ‘किफायती किराया आवास’ (Affordable Rental Housing – ARH) की व्यवस्था शुरू की जाएगी, यह विशेष रुप से शहरी गरीबों, कामकाजी महिलाओं और औद्योगिक श्रमिकों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी।
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किसे मिलेगा लाभ? (पात्रता के नए नियम)
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, योजना का लाभ लेने के लिए कुछ कड़े लेकिन स्पष्ट मानक तय किए गए हैं:
- आय सीमा: EWS के लिए ₹3 लाख और LIG के लिए ₹6 लाख तक की वार्षिक आय अनिवार्य है।
- कट-ऑफ डेट: केवल वे ही आवेदक पात्र होंगे जिनके पास 31 अगस्त 2024 से पहले जमीन का मालिकाना हक था।
- वरीयता: स्ट्रीट वेंडर्स, झुग्गीवासियों और कामकाजी महिलाओं को आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी।
योगी सरकार का यह फैसला प्रदेश में ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ के लक्ष्य को तेजी से पूरा करने की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
















