
भारतीय सड़कों पर चलते हुए आपने सेना के ट्रकों, जीपों और अन्य वाहनों को जरुर देखा होगा इन वाहनों की नंबर प्लेट सामान्य गाड़ियों (सफेद या पीली प्लेट) से बिल्कुल अलग होती है सेना की इन नंबर प्लेट्स पर सबसे पहले ऊपर की ओर इशारा करता हुआ एक तीर का निशान (↑) बना होता है, क्या आपने कभी सोचा है कि इसका मतलब क्या है?
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क्या कहलाता है यह ‘तीर’?
सैन्य शब्दावली में इस निशान को ‘ब्रॉड एरो’ (Broad Arrow) कहा जाता है, यह कोई साधारण डिजाइन नहीं है, बल्कि ब्रिटिश काल से चली आ रही एक परंपरा और कानूनी पहचान है।
क्यों लगाया जाता है यह खास निशान?
इस तीर को लगाने के पीछे दो मुख्य तकनीकी और ऐतिहासिक कारण हैं:
- युद्ध या आपातकालीन स्थिति में यदि कोई सैन्य वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट जाता है, तो भी ‘ब्रॉड एरो’ की मदद से नंबर प्लेट को सही दिशा में पढ़ा जा सकता है। तीर का सिरा हमेशा ऊपर की ओर होता है, जिससे यह पता चलता है कि नंबर को किस तरफ से पढ़ना शुरू करना है, इससे राहत कार्यों में गलती की गुंजाइश खत्म हो जाती है। जागरण
- ऐतिहासिक रूप से, ब्रिटिश साम्राज्य में सरकारी और सैन्य संपत्तियों पर ‘ब्रॉड एरो’ का उपयोग किया जाता था ताकि उन्हें निजी संपत्ति से अलग पहचाना जा सके। भारतीय सेना ने आजादी के बाद भी इस मानक को बरकरार रखा।
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कैसे डिकोड होती है सेना की नंबर प्लेट?
सेना की नंबर प्लेट पर लिखे हर अंक और अक्षर का एक विशेष अर्थ होता है:
- पहला भाग (↑): यह रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) के अधीन वाहन होने का प्रमाण है।
- अगले दो अंक: यह दर्शाते हैं कि गाड़ी किस साल सेना में शामिल हुई। उदाहरण के लिए, ’21’ का मतलब है कि गाड़ी साल 2021 में खरीदी गई।
- बीच के अक्षर: ये वाहन की कैटेगरी (जैसे कार, ट्रक या एम्बुलेंस) को दर्शाते हैं।
- अंतिम अक्षर: यह एक विशेष ‘चेक कोड’ होता है, जो सुरक्षा के लिहाज से गुप्त रखा जाता है। अमर उजाला
RTO के नियमों से अलग है व्यवस्था
खास बात यह है कि सेना की गाड़ियाँ स्थानीय आरटीओ (RTO) के तहत पंजीकृत नहीं होती हैं, इनका पूरा रिकॉर्ड केवल रक्षा मंत्रालय के पास सुरक्षित रहता है यही कारण है कि इन वाहनों को किसी भी राज्य की सीमा पार करने के लिए अलग से परमिट की जरुरत नहीं पड़ती।
















