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100-200 नहीं, पेट्रोल पंप पर 110, 210 या 510 का तेल डलवाने के क्या हैं फायदे? जानें तेल चोरी से बचने का तरीका

पेट्रोल पंप पर 110, 210 या 510 रुपये का तेल भरवाना आम ट्रिक है, लेकिन यह चोरी से बचाव नहीं, बल्कि महंगा भ्रम है। प्री-सेट बटनों के डर से विषम रकम बोलते हैं, पर एक्स्ट्रा 10 रुपये फालतू जाते हैं। लीटर मंगाएं, मीटर चेक करें, रसीद लें

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पेट्रोल पंपों पर हर दिन लाखों वाहन चालक 100 रुपये की जगह 110, 200 की जगह 210 या 500 की जगह 510 रुपये का तेल भरवाते नजर आते हैं। यह ट्रिक सालों से प्रचलित है और सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है। लेकिन क्या यह वाकई तेल चोरी से बचाती है या सिर्फ जेब पर बोझ डाल रही है? एक अनुभवी रिपोर्टर की नजर से इसकी गहराई से पड़ताल।

100-200 नहीं, पेट्रोल पंप पर 110, 210 या 510 का तेल डलवाने के क्या हैं फायदे? जानें तेल चोरी से बचने का तरीका

प्री-सेट बटनों का शक

पेट्रोल पंपों की आधुनिक डिजिटल मशीनों में 100, 200, 500 जैसे गोल नंबरों के लिए पहले से सेट बटन होते हैं। कर्मचारी एक बटन दबाता है और तुरंत उतना तेल नोजल से निकलने लगता है जितना मौजूदा रेट के हिसाब से बनता है। कई ड्राइवरों को लगता है कि इन बटनों पर छेड़छाड़ हो सकती है, जिससे कम तेल मिल जाता है। इसी डर से वे 110 या 510 जैसे विषम अमाउंट बोलते हैं, ताकि मैन्युअल कैलकुलेशन हो और ‘एक्स्ट्रा 10 रुपये’ से ज्यादा तेल मिले। पंजाब-हरियाणा जैसे क्षेत्रों में बाइकर्स और कार मालिक रोजाना यही करते हैं, खासकर जब पेट्रोल 95-105 रुपये प्रति लीटर के आसपास होता है।

यह भ्रम पुरानी मैनुअल मशीनों के जमाने से चला आ रहा है, जब मीटर में हेरफेर आसान था। आजकल सॉफ्टवेयर आधारित मशीनें कैलिब्रेटेड होती हैं और वेट्स एंड मेजर्स विभाग की सख्ती के बाद पारदर्शिता बढ़ी है। फिर भी, यूट्यूब वीडियो और व्हाट्सएप फॉरवर्ड इस मिथक को जिंदा रखे हुए हैं।

कथित फायदे

इस ट्रिक के समर्थक कुछ फायदे गिनाते हैं। पहला, प्री-सेट बटन से बचाव विषम अमाउंट पर ऑपरेटर को मैन्युअली अमाउंट डालना पड़ता है, जिससे शक कम होता है। दूसरा, व्यस्त पंपों पर समय की बचत, क्योंकि मशीनें 110-510 जैसे लोकप्रिय ऑप्शन भी तेजी से हैंडल कर लेती हैं। तीसरा, 10 रुपये एक्स्ट्रा देने से ‘ज्यादा वैल्यू’ का अहसास होता है, जो मानसिक शांति देता है।

हालांकि ये फायदे ज्यादातर भ्रम हैं। अगर पेट्रोल 100 रुपये लीटर है, तो 110 में ठीक 1.10 लीटर ही मिलेगा। कोई जादू नहीं। सालाना 300 बार ऐसा करने पर 3000 रुपये फालतू खर्च हो जाते हैं, जो छोटे वाहन चालकों के लिए बड़ा नुकसान है।

असली नुकसान: चोरी रुकती नहीं, खर्च बढ़ता है

सच्चाई यह है कि चोरी अमाउंट बदलने से नहीं रुकती। मीटर रीसेट न करना, नोजल से रिसाव या डेंसिटी में गड़बड़ी असली समस्या हैं। विषम रकम बोलने से आप एक्स्ट्रा पैसे दे रहे हैं बिना लाभ के। लुधियाना जैसे शहरों में उपभोक्ता शिकायतें बताती हैं कि घपला मीटर टैंपरिंग से होता है, न कि राउंड फिगर से। ऊपर से, बार-बार एक्स्ट्रा देने से मासिक ईंधन बजट 15-20 प्रतिशत फूल जाता है।

बचाव के सही तरीके

तेल चोरी से बचने के व्यावहारिक उपाय अपनाएं। सबसे पहला, लीटर में तेल मंगाएं जैसे ‘5 लीटर पेट्रोल दो’। इससे मात्रा फिक्स रहती है। भरने से पहले मीटर पर 0.00 जरूर चेक करें। रसीद हर बार लें, जो कानूनी सबूत बनेगी। CCTV वाले विश्वसनीय पंप चुनें और ऑपरेटर की हरकतों पर नजर रखें। शक हो तो मैनेजर बुलाएं या हेल्पलाइन 1800-180-1514 पर शिकायत दर्ज करें। पंजाब में पिछले साल सैकड़ों पंपों पर छापे हुए, जहां मीटर धोखा पकड़ा गया।

अंत में, यह ट्रिक छोड़ें। लीटर बोलें, मीटर देखें, रसीद रखें। इससे न सिर्फ पैसे बचेंगे, बल्कि सिस्टम पर भरोसा भी बढ़ेगा। अगली बार पंप पर स्मार्ट बनें भ्रम में न फंसें!

Author
info@ortpsa.in

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