
भारत में सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) का मतलब केवल एक पद नहीं, बल्कि जीवन भर की सुरक्षा और समाज में रौब है, हाल ही में आए रोज़गार डेटा और रुझानों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश के युवाओं के बीच ‘सरकारी बाबू’ बनने की होड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है, अक्सर चपरासी के पदों के लिए भी लाखों की तादाद में PhD और MBA डिग्री धारक आवेदन कर रहे हैं।
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किस राज्य में हैं सबसे ज्यादा सरकारी कर्मचारी?
पब्लिक सेक्टर एम्प्लॉयमेंट एनालिसिस (2025) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश (UP) देश में सरकारी नौकरियों का सबसे बड़ा हब बनकर उभरा है उत्तर प्रदेश: यहाँ लगभग 72 लाख लोग सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, जो किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अधिक है, महाराष्ट्र: इस सूची में महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर है, जहाँ करीब 48 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, हिमाचल प्रदेश: हालाँकि संख्या कम है, लेकिन कार्यबल के प्रतिशत (Job per workforce ratio) के मामले में हिमाचल प्रदेश सबसे आगे है, जहाँ 9% कार्यबल सरकारी नौकरियों में है।
क्यों है ‘सरकारी बाबू’ बनने की ऐसी दीवानगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस ‘क्रेज’ के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
- जॉब सिक्योरिटी: प्राइवेट सेक्टर में मंदी और छंटनी के डर के बीच सरकारी नौकरी को ‘अमरता का वरदान’ माना जाता है।
- सामाजिक प्रतिष्ठा: शादी के बाज़ार से लेकर समाज के हर मोड़ तक, एक सरकारी कर्मचारी को सम्मान की नजरों से देखा जाता है।
- आकर्षक भत्ते: पेंशन, मेडिकल सुविधा और रहने के लिए सरकारी आवास आज भी युवाओं को आकर्षित करते हैं।
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नौकरी एक, दावेदार हज़ार
आंकड़े बताते हैं कि यह राह आसान नहीं है, एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 8 वर्षों में लगभग 22 करोड़ युवाओं ने केंद्रीय सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन किया, लेकिन सफलता केवल 0.33% को ही मिली रेलवे जैसे विभागों में एक-एक भर्ती के लिए आवेदकों की संख्या कई छोटे देशों की कुल आबादी से भी अधिक हो जाती है।
















