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यूपी का वो इकलौता जिला जहाँ आज भी नहीं है कोई रेलवे स्टेशन! गूगल मैप्स भी हो जाता है फेल, जानें क्या है वजह?

उत्तर प्रदेश, जो अपने विशाल रेल नेटवर्क और देश के सबसे बड़े जंक्शनों के लिए जाना जाता है, वहाँ एक ऐसा भी कोना है जहाँ आज भी 'लोहपथगामिनी' (ट्रेन) की गूँज नहीं सुनाई देती विकास के तमाम दावों के बीच श्रावस्ती यूपी का वह इकलौता जिला है, जहाँ आज तक एक भी रेलवे स्टेशन नहीं बना है

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यूपी का वो इकलौता जिला जहाँ आज भी नहीं है कोई रेलवे स्टेशन! गूगल मैप्स भी हो जाता है फेल, जानें क्या है वजह?
यूपी का वो इकलौता जिला जहाँ आज भी नहीं है कोई रेलवे स्टेशन! गूगल मैप्स भी हो जाता है फेल, जानें क्या है वजह?

उत्तर प्रदेश, जो अपने विशाल रेल नेटवर्क और देश के सबसे बड़े जंक्शनों के लिए जाना जाता है, वहाँ एक ऐसा भी कोना है जहाँ आज भी ‘लोहपथगामिनी’ (ट्रेन) की गूँज नहीं सुनाई देती विकास के तमाम दावों के बीच श्रावस्ती यूपी का वह इकलौता जिला है, जहाँ आज तक एक भी रेलवे स्टेशन नहीं बना है। 

यह भी देखें: गंगा के बाद भारत की दूसरी सबसे लंबी नदी कौन सी है? 99% लोग देते हैं गलत जवाब, कहीं आप भी तो नहीं?

गूगल मैप्स भी खा जाता है धोखा 

हैरानी की बात यह है कि जब आप गूगल मैप्स पर ‘Shravasti Railway Station’ सर्च करते हैं, तो तकनीक भी जवाब दे देती है, मैप्स आपको या तो पड़ोसी जिले बलरामपुर या बहराइच के स्टेशनों की ओर मोड़ देता है या फिर ‘Result Not Found’ का संकेत देता है, डिजिटल इंडिया के दौर में भी इस जिले का रेलवे मैप से गायब होना पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

क्यों है यह जिला रेल से महरुम?

भगवान बुद्ध की तपोस्थली और ऐतिहासिक महत्व होने के बावजूद श्रावस्ती के रेल नेटवर्क से न जुड़ पाने के पीछे कई भौगोलिक और तकनीकी कारण रहे हैं।

  • भौगोलिक स्थिति: यह जिला भारत-नेपाल सीमा के करीब स्थित है और यहाँ की नदियों व तराई क्षेत्र की बनावट ने रेल पटरियाँ बिछाने के काम को दशकों तक रोके रखा।
  • कनेक्टिविटी की अनदेखी: लंबे समय तक इस जिले को मुख्य रेल लाइनों से जोड़ने के लिए कोई ठोस योजना धरातल पर नहीं उतर सकी।

अब जागी उम्मीद: 2029 तक पूरा होगा इंतजार

श्रावस्ती के लोगों का दशकों पुराना इंतज़ार अब खत्म होने की ओर है। केंद्र सरकार की बहराइच-खलीलाबाद नई रेल लाइन परियोजना के तहत श्रावस्ती को रेल मार्ग से जोड़ने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।

  • नई परियोजना: लगभग 240 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण का काम शरु हो चुका है।
  • बजट और लक्ष्य: इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही श्रावस्ती सीधे तौर पर रेल मानचित्र पर आ जाएगा जानकारों की मानें तो 2029 तक यहाँ के लोग पहली बार अपने जिले में ट्रेन की सीटी सुन सकेंगे।

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पर्यटन पर पड़ेगा बड़ा असर

बौद्ध सर्किट का हिस्सा होने के कारण हर साल हजारों विदेशी सैलानी श्रावस्ती आते हैं, फिलहाल उन्हें लखनऊ या गोंडा से सड़क मार्ग के जरिए यहाँ पहुंचना पड़ता है, रेलवे स्टेशन बनने से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय व्यापार की तस्वीर भी बदल जाएगी।

Railway Station Which District Does not Have Railway Station
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info@ortpsa.in

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