
जब भी दुनिया की विशाल आबादी की बात होती है, तो हमारे जेहन में सबसे पहले भारत और चीन का नाम आता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया के नक्शे पर एक ऐसा ‘रहस्यमयी घेरा’ भी है, जो क्षेत्रफल में तो बहुत छोटा है, लेकिन वहां पूरी दुनिया की आधी से अधिक आबादी निवास करती है? इस खास भौगोलिक क्षेत्र को ‘वैलरीपिएरिस सर्कल’ (Valeriepieris Circle) के नाम से जाना जाता है।
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क्या है वैलरीपिएरिस सर्कल?
साल 2013 में ‘Valeriepieris’ नामक एक रेडिट यूजर (केन मायर्स) ने एक नक्शा साझा किया, जिसने पूरी दुनिया के जनसांख्यिकी विशेषज्ञों को हैरान कर दिया। इस नक्शे में दक्षिण-पूर्व एशिया के ऊपर एक सर्कल बनाया गया था। डेटा के विश्लेषण से पता चला कि इस छोटे से घेरे के भीतर जितने लोग रहते हैं, उससे कम लोग पूरी बाकी दुनिया (शेष 93% हिस्सा) में मिलाकर रहते हैं।
इस सर्कल की मुख्य विशेषताएं
- छोटा क्षेत्रफल, विशाल आबादी: यह सर्कल पृथ्वी के कुल सतह क्षेत्र का मात्र 6.7% हिस्सा कवर करता है, लेकिन यहाँ दुनिया की 50% से ज्यादा जनसंख्या रहती है।
- प्रमुख देश: इस घेरे के अंदर भारत, चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम, जापान, थाईलैंड, फिलीपींस और मलेशिया जैसे घनी आबादी वाले देश पूरी तरह या आंशिक रूप से शामिल हैं।
- केंद्र बिंदु: इस सर्कल का केंद्र दक्षिण-पूर्वी म्यांमार में स्थित है और इसकी त्रिज्या (Radius) लगभग 4,000 किलोमीटर है।
यहाँ इतनी आबादी क्यों है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में आबादी के इतने सघन होने के पीछे कोई चमत्कार नहीं, बल्कि भौगोलिक और प्राकृतिक कारण हैं।
- उपजाऊ जमीन: यहाँ की मिट्टी बेहद उपजाऊ है, जो बड़ी आबादी का पेट भरने के लिए पर्याप्त अनाज पैदा करती है।
- पानी की उपलब्धता: इस क्षेत्र में बहने वाली बड़ी नदियाँ और मानसूनी बारिश कृषि और जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ पैदा करती हैं।
- जलवायु: यहाँ की जलवायु खेती, विशेषकर चावल की खेती के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।
आज की स्थिति
हालांकि 2013 के बाद से वैश्विक आबादी में कई बदलाव आए हैं, लेकिन 2016 में अर्थशास्त्री डैनी क्वाह (Danny Quah) द्वारा किए गए शोध में भी इस बात की पुष्टि हुई कि आज भी दुनिया की अधिकांश आबादी इसी सीमित दायरे में सिमटी हुई है, यह सर्कल हमें याद दिलाता है कि पृथ्वी का एक बहुत बड़ा हिस्सा आज भी निर्जन या कम आबादी वाला है, जबकि संसाधनों की प्रचुरता ने दक्षिण-पूर्व एशिया को ‘मानवता का केंद्र’ बना दिया है।
















