कल्पना कीजिए कि आप फोन से सिम कार्ड निकालते हैं और अचानक WhatsApp खुल ही नहीं पाता। यह अब महज कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत बनने वाला है। भारत सरकार ने मैसेजिंग ऐप्स के लिए सिम बाइंडिंग का सख्त नियम लागू किया है। इसके तहत WhatsApp, Signal और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म्स सिम कार्ड से जुड़ना अनिवार्य होगा। सिम निष्क्रिय या निकाला गया तो अकाउंट तुरंत बंद हो जाएगा। यह कदम साइबर अपराधियों पर लगाम लगाने के मकसद से उठाया गया है, जो देशभर के करोड़ों यूजर्स की दिनचर्या बदल सकता है।

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नियम कैसे काम करेगा?
यह व्यवस्था नवीनतम साइबरसुरक्षा दिशानिर्देशों का हिस्सा है, जो पिछले साल के अंत में घोषित हुई। ऐप कंपनियों को इसके लिए सीमित समय दिया गया है, जो अब समाप्ति की कगार पर है। हर ऐप को फोन में मौजूद सिम की लगातार जांच करनी होगी। तकनीकी भाषा में इसे IMSI यानी इंटरनेशनल मोबाइल सब्सक्राइबर आइडेंटिटी चेक कहते हैं। अगर सिम फोन में न हो या नेटवर्क से जुड़ा न हो, तो ऐप एक्सेस पूरी तरह ब्लॉक हो जाएगा। वेब वर्जन पर तो हर छह घंटे में दोबारा लॉगिन करना पड़ेगा, जिसमें क्यूआर कोड स्कैन जरूरी होगा। रोमिंग में यात्रा करने वालों को राहत है, बशर्ते सिम डिवाइस में मौजूद रहे।
साइबर फ्रॉड पर क्यों भारी पड़ी सख्ती?
देश में साइबर धोखाधड़ी का ग्राफ तेजी से चढ़ रहा है। पिछले एक साल में अरबों रुपये का नुकसान हुआ है, क्योंकि स्कैमर चोरी हुए या बंद सिम कार्ड्स से फर्जी अकाउंट बनाते हैं। वे यूपीआई लिंक भेजकर पैसे उड़ाते हैं, धमकियां देते हैं या निजी जानकारी चुराते हैं। बिना सक्रिय सिम के चलने वाले ऐप्स इसी का शिकार बनते रहे हैं। सरकार का मानना है कि सिम बाइंडिंग से अपराधियों की पहचान आसान हो जाएगी और ट्रेसबिलिटी मजबूत होगी। सेलुलर ऑपरेटर्स ने इसे सराहा है, लेकिन कुछ डिजिटल संगठनों ने यूजर्स की परेशानी की ओर इशारा किया है।
करोड़ों यूजर्स पर क्या पड़ेगा असर?
भारत में WhatsApp के आधे अरब से ज्यादा इस्तेमालकर्ता हैं। ज्यादातर लोग दोहरी सिम वाले फोन इस्तेमाल करते हैं या पुरानी सिम रखते हैं। ऐसे में एक सिम हटाने पर मुख्य अकाउंट प्रभावित हो सकता है। बिना सिम के केवल वाई-फाई पर चालू रखने वाले सबसे ज्यादा मुश्किल में फंसेंगे। यूपीआई ऐप्स में यह सुविधा पहले से मौजूद है, इसलिए बैंकिंग लेन-देन सुरक्षित रहेंगे। गैर-अनुपालन पर कड़े कानूनी प्रावधान हैं, जो ऐप कंपनियों को मजबूर करेंगे। यूजर्स को अब सिम को ऐप से जोड़ना होगा, वरना सर्विस रुक जाएगी।
यूजर्स के लिए जरूरी सावधानियां
तुरंत अपने प्राइमरी नंबर को ऐप से लिंक कर लें। सेटिंग्स में जाकर वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करें। सिम बदलने से पहले नंबर अपडेट करवाएं। डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फर्जी संदेशों पर भरोसा न करें और पासवर्ड मजबूत रखें। ई-सिम या वाई-फाई कॉलिंग यूजर्स को स्पष्ट निर्देशों का इंतजार है। प्राइवेसी पर सवाल उठ रहे हैं कि कहीं यह निगरानी न बढ़ा दे।
आगे की राह में चुनौतियां
यह नियम डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करेगा, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों और कम तकनीकी जानकारी वाले यूजर्स के लिए जटिल साबित हो सकता है। फ्रॉड में कमी की उम्मीद है, लेकिन सुविधा पर असर पड़ेगा। सरकार और ऐप कंपनियों को मिलकर यूजर-फ्रेंडली गाइडलाइंस जारी करनी चाहिए। सतर्क रहें, क्योंकि बदलाव का दौर शुरू हो चुका है।
















