
आज के डिजिटल युग में WhatsApp केवल बातचीत का माध्यम नहीं, बल्कि कानूनी लड़ाइयों में एक बड़ा हथियार बन चुका है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कोर्ट में पेश किया गया एक साधारण स्क्रीनशॉट आपकी बेगुनाही साबित करने के लिए काफी नहीं है? इसके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की Section 65B (अब Bharatiya Sakshya Adhiniyam के तहत Section 63) की शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है।
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क्या स्क्रीनशॉट कोर्ट में मान्य है?
सिर्फ स्क्रीनशॉट या उसका प्रिंटआउट कोर्ट में ‘कमजोर सबूत’ माना जाता है, कोर्ट इसे तब तक स्वीकार नहीं करता जब तक इसकी सत्यता (Authenticity) प्रमाणित न हो जाए।
‘Section 65B’ सर्टिफिकेट क्यों है जरुरी?
कानून के अनुसार, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड (जैसे WhatsApp मैसेज) को सेकेंडरी एविडेंस के तौर पर पेश करने के लिए Section 65B(4) का सर्टिफिकेट देना अनिवार्य है।
- प्रमाणन: यह सर्टिफिकेट यह सुनिश्चित करता है कि डिवाइस सही तरीके से काम कर रहा था और डेटा के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।
- अनिवार्यता: सुप्रीम कोर्ट (Arjun Panditrao vs Kailash Kushan Rao) ने साफ किया है कि बिना इस सर्टिफिकेट के डिजिटल प्रिंटआउट्स को सबूत नहीं माना जाएगा।
नया कानून: Bharatiya Sakshya Adhiniyam (BSA), 2023
1 जुलाई 2024 से लागू नए कानून में Section 65B की जगह Section 63 ने ले ली है।
- दायरा: इसमें स्मार्टफोन और अन्य संचार उपकरणों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
- नियम: अब इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पेश करते समय एक निर्धारित प्रारूप (Format) में सर्टिफिकेट देना और भी कड़ा कर दिया गया है।
कब नहीं पड़ती सर्टिफिकेट की जरुरत?
अगर आप कोर्ट में अपना ओरिजिनल डिवाइस (वह फोन जिससे मैसेज भेजे या प्राप्त किए गए) सीधे पेश कर देते हैं, तो सर्टिफिकेट की जरुरत नहीं होती। इसे ‘प्राइमरी एविडेंस’ माना जाता है।
बेगुनाही साबित करने के लिए सावधानियां
- डिवाइस सुरक्षित रखें: चैट डिलीट न करें और न ही फोन फॉर्मेट करें।
- फॉरवर्डेड मैसेज: फॉरवर्ड किए गए मैसेज बहुत कमजोर सबूत होते हैं क्योंकि उनका सोर्स संदिग्ध हो सकता है।
- एक्सपर्ट की राय: जरुरत पड़ने पर कोर्ट फॉरेंसिक जांच (FSL) के आदेश भी दे सकता है।















