ठंड के साये से बाहर निकलते ही उत्तर भारत का मौसम एकदम से करवट लेने को तैयार है। फरवरी के मध्य में अचानक बादल घने हो गए हैं और हवा में नमी का अहसास होने लगा है। जहां एक ओर सूरज की गुनगुनी किरणें लोगों को लुभा रही थीं, वहीं अब काली घटाएं आसमान में छा रही हैं। यह बदलाव न सिर्फ दैनिक जीवन को प्रभावित करेगा, बल्कि किसानों की फसलों और यात्रा करने वालों के लिए भी चुनौती बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मौसम का खतरनाक यूटर्न जलवायु परिवर्तन का संकेत दे रहा है।

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क्यों आया यह मौसम परिवर्तन
पश्चिमी विक्षोभ की दो लहरें एक के बाद एक सक्रिय हो रही हैं, जो पहाड़ी इलाकों से मैदानी क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं। पहली लहर अभी चरम पर है, जबकि दूसरी 17 से 19 फरवरी तक अपना असर दिखाएगी। इनके प्रभाव से हल्की से मध्यम बारिश होने की पूरी संभावना है। तेज हवाएं 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती हैं, जो पेड़ों को उखाड़ सकती हैं और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहा निम्न दबाव क्षेत्र भी पूर्वी हिस्सों को भिगोने को बेताब है। तापमान में दो से तीन डिग्री की गिरावट दर्ज हो सकती है, जिससे दिन का अधिकतम तापमान 26 डिग्री के आसपास और न्यूनतम 11 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क सकता है।
किन-किन इलाकों पर भारी
इस मौसम के तांडव का असर दिल्ली-एनसीआर से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भागों तक फैलेगा। पंजाब और हरियाणा के खेतों में बादल गरजने लगेंगे, जबकि राजस्थान के रेतीले इलाकों में पानी की बौछारें पड़ेंगी। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्यों में ऊंचाई वाले क्षेत्रों पर बर्फबारी का डर है, जो सड़कों को फिसलन भरा बना देगी। पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ में भी छिटपुट बारिश संभव है। कुल मिलाकर आठ राज्य इसकी चपेट में हैं। इन इलाकों में सुबह से ही आसमान में काले बादल छाए नजर आ रहे हैं और हल्की फुहारें गिरने लगी हैं।
जनजीवन पर पड़ेगा गहरा असर
बारिश की इस फुहार से वायु गुणवत्ता तो बेहतर हो सकती है, लेकिन ठंडक लौटने से सर्दी-जुकाम के मामले बढ़ सकते हैं। दिल्ली में वर्तमान में प्रदूषण का स्तर खराब है, जो हवा की गति से थोड़ा सुधरेगा। किसानों को रबी की फसलें जैसे गेहूं और सरसों को ढकने की जरूरत है, वरना ओलावृष्टि से नुकसान हो सकता है। हवाई यात्राएं विलंबित हो सकती हैं और सड़क यातायात में रुकावटें आएंगी। स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को घर में रहने की सलाह दी जा रही है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे बाहर निकलने से पहले स्थानीय पूर्वानुमान जरूर जांच लें।
सावधानियां और आगे की उम्मीद
ऐसे मौसम में छाता या रेनकोट साथ रखें। फसलें सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल का इस्तेमाल करें। ड्राइविंग के दौरान सावधानी बरतें, खासकर पहाड़ी रास्तों पर। बिजली गिरने का खतरा होने से खुले में न खड़े हों। अच्छी बात यह है कि 19 फरवरी के बाद मौसम फिर से सुधरने लगेगा और तापमान में बढ़ोतरी होगी। हालांकि, अगले कुछ दिनों तक सतर्क रहना जरूरी है। यह घटना हमें मौसम की अनिश्चितता की याद दिलाती है। प्रकृति के इस खेल में मनुष्य को हमेशा तैयार रहना पड़ता है। स्थानीय मौसम ऐप्स पर नजर रखें ताकि कोई आश्चर्य न रह जाए।
















