
डिजिटल इंडिया के दौर में UPI (Unified Payments Interface) का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए एक बड़ी खबर है, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और ‘गलत पेमेंट’ की समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए 28 फरवरी 2026 से पुराने भुगतान सिस्टम में ऐतिहासिक बदलाव लागू कर दिया है।
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क्या है नया नियम?
अब तक यूजर्स किसी का भी मोबाइल नंबर या UPI ID मैन्युअल रूप से टाइप करके पैसे भेज सकते थे, जिसे तकनीकी भाषा में ‘UPI Collect’ कहा जाता था। अब इस फीचर को सामान्य यूज़र्स के लिए बंद कर दिया गया है।
अब पैसे भेजने का क्या होगा तरीका?
नए नियमों के मुताबिक, अब यूज़र्स को सुरक्षित ट्रांजैक्शन के लिए निम्नलिखित तरीकों को अपनाना होगा:
- QR कोड स्कैनिंग: दुकानों या व्यक्तियों को भुगतान करने के लिए अब QR कोड स्कैन करना सबसे प्राथमिक और अनिवार्य तरीका बन गया है।
- डायरेक्ट ऐप आइकन्स (Contacts): अगर आपको किसी परिचित को पैसे भेजने हैं, तो आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट से सीधे उनका नाम चुनकर पेमेंट कर पाएंगे, जिससे नंबर टाइप करने की गलती की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
- 10 सेकंड में ट्रांजैक्शन: नए API अपडेट के बाद अब UPI भुगतान और रिस्पांस केवल 10 सेकंड के भीतर पूरे होंगे, जिससे पेंडिंग ट्रांजैक्शन की समस्या कम होगी।
बड़ी रकम के लिए अतिरिक्त सुरक्षा
NPCI ने 1 मार्च 2026 से हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन के लिए नियमों को और सख्त कर दिया है:
- मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन: बड़ी राशि भेजने के लिए केवल UPI PIN पर्याप्त नहीं होगा, बैंकों को अब बायोमेट्रिक्स या अन्य अतिरिक्त सुरक्षा मानकों को अनिवार्य करना होगा।
- कलेक्ट रिक्वेस्ट पर बैन: P2P (पर्सन-टू-पर्सन) कलेक्ट रिक्वेस्ट, जिसे ‘Pull Transaction’ भी कहा जाता था, उसे पहले ही 1 अक्टूबर 2025 से बंद किया जा चुका है ताकि अनजान लोग आपसे पैसे न मांग सकें।
सावधानी ही सुरक्षा है
NPCI का कहना है कि ये बदलाव यूजर्स के पैसे को सुरक्षित रखने और स्कैमर्स द्वारा गलत UPI ID का फायदा उठाने से रोकने के लिए किए गए हैं अगर आपकी UPI ID लंबे समय से निष्क्रिय है, तो उसे दोबारा सक्रिय करने के लिए अब री-वेरिफिकेशन की आवश्यकता होगी।















