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UP में आधार कार्ड का नया नियम! अब बार-बार नहीं बदल पाएगी जन्मतिथि, फर्जीवाड़े पर लगाम के लिए सरकार ने उठाया सख्त कदम

यूपी सरकार ने सख्त नियम लगा दिया। जन्मतिथि बदलना नामुमकिन, फर्जीवाड़ा बंद! नौकरी-पेंशन में परेशानी? जानिए क्या करें, कौन से कागज लें। ये बदलाव आपकी जिंदगी पलट देगा!

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उत्तर प्रदेश सरकार ने आधार कार्ड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब जन्मतिथि को साबित करने के लिए आधार कार्ड को कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं माना जाएगा। यह कदम फर्जीवाड़े को रोकने के लिए उठाया गया है, जिससे सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आएगी।

UP में आधार कार्ड का नया नियम! अब बार-बार नहीं बदल पाएगी जन्मतिथि, फर्जीवाड़े पर लगाम के लिए सरकार ने उठाया सख्त कदम

बदलाव की पृष्ठभूमि

लंबे समय से शिकायत थी कि लोग आधार कार्ड में जन्मतिथि बार-बार बदलवाते हैं। इसका इस्तेमाल नौकरी, पेंशन और योजनाओं में उम्र साबित करने के लिए किया जाता रहा। सरकार ने पाया कि आधार बनाते समय जन्मतिथि अक्सर खुद बताई जाती है, बिना किसी पक्के प्रमाण के। इसलिए नियोजन विभाग ने सभी सरकारी विभागों को साफ निर्देश जारी किए। अब नौकरियों के आवेदन, प्रमाणीकरण या सत्यापन में आधार की जन्मतिथि काम नहीं आएगी।

जन्मतिथि सुधार के नए तरीके

अब आधार में जन्मतिथि बदलने की प्रक्रिया सख्त हो गई है। पहले लोग पुराना जन्म प्रमाणपत्र रद्द करवा नया बनवाते थे, जिसमें नई तारीख डलवा ली जाती। इस तरह आधार आसानी से अपडेट हो जाता। लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। जन्म प्रमाणपत्र की मूल पंजीकरण संख्या वही रहनी होगी। मतलब पहले वाले प्रमाणपत्र में ही सुधार कराना पड़ेगा। अगर नया प्रमाणपत्र या अलग नंबर वाला कागज दिखाया गया, तो उसे खारिज कर दिया जाएगा। यह नियम हाल ही में लागू हुआ है और लाखों लोगों को प्रभावित करेगा।

क्यों जरूरी था यह कदम

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जन्मतिथि से जुड़े बदलाव आधार संशोधनों का बड़ा हिस्सा थे। लोग उम्र कम दिखाकर लाभ लेते रहे। स्कूल रिकॉर्ड, अस्पताल दस्तावेज या जन्म प्रमाणपत्रों में हेरफेरी आम थी। सरकार का मानना है कि इससे पहचान की धोखाधड़ी रुकेगी। सभी विभागों को हिदायत है कि वैध कागज जैसे पासपोर्ट, दसवीं की मार्कशीट या आधिकारिक जन्म प्रमाणपत्र ही मानें। आधार सिर्फ पहचान और पते का प्रमाण है, जन्म की तारीख का नहीं।

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आम लोगों पर असर

यह नियम रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करेगा। पेंशन लेने वाले, नौकरी तलाशने वाले या छात्रवृत्ति आवेदक अब वैकल्पिक दस्तावेज जुटाएंगे। ग्रामीण इलाकों में जहां जन्म प्रमाणपत्र कम हैं, वहां परेशानी हो सकती है। लेकिन लंबे समय में सिस्टम मजबूत बनेगा। विशेषज्ञ कहते हैं कि डिजिटल दस्तावेजों को और मजबूत करने की जरूरत है।

आगे की राह

सरकार अन्य राज्यों के लिए भी यह मिसाल बनेगी। आधार को केवल पहचान के लिए इस्तेमाल करने पर जोर है। नागरिकों को सलाह है कि वे पहले से अपने मूल दस्तावेजों को सुरक्षित रखें। जन्म प्रमाणपत्र में सुधार समय पर करा लें। फर्जी कागज दिखाने पर कानूनी कार्रवाई का खतरा है। यह बदलाव प्रशासन को पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Author
info@ortpsa.in

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