
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने देशभर के टोल प्लाजा पर एक क्रांतिकारी बदलाव लागू किया है अब नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों को टोल टैक्स का भुगतान करने के लिए नकदी (कैश) की सुविधा नहीं मिलेगी यह नियम 1 अप्रैल 2026 से देशभर के 1,150 से अधिक टोल प्लाजा पर प्रभावी हो गया है।
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डिजिटल पेमेंट हुआ अनिवार्य
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के नए आदेश के अनुसार, टोल प्लाजा पर कैश लेनदेन को पूरी तरह बंद कर दिया गया है अब यात्रियों के पास भुगतान के केवल दो ही विकल्प होंगे:
- FASTag: आरएफआईडी (RFID) आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह।
- UPI: डिजिटल पेमेंट ऐप्स के जरिए क्यूआर (QR) कोड स्कैन करके भुगतान।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार का मुख्य उद्देश्य टोल प्लाजा पर लगने वाले लंबे जाम और ट्रैफिक की समस्या को सुलझाना है NHAI के अनुसार, डिजिटल पेमेंट से:
- समय की बचत: टोल बूथ पर रुकने का समय घटकर मात्र 3 सेकंड रह जाएगा।
- पारदर्शिता: टोल संग्रह में पारदर्शिता बढ़ेगी और धांधली की गुंजाइश खत्म होगी।
- ईंधन की बचत: वाहनों की लंबी कतारें न लगने से ईंधन की खपत कम होगी और पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा।
नियम तोड़ने पर लगेगा भारी जुर्माना
यदि आप बिना वैध FASTag या डिजिटल भुगतान माध्यम के टोल लेन में प्रवेश करते हैं, तो आपको दोगुना टोल शुल्क या भारी जुर्माना देना पड़ सकता है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 10 अप्रैल 2026 तक सभी टोल बूथों से कैश लेन को पूरी तरह हटाकर 100% डिजिटल इकोसिस्टम बना दिया जाएगा।
सालाना पास और टोल दरों में बदलाव
नए नियमों के साथ ही 1 अप्रैल से टोल दरों में भी लगभग 5% तक की बढ़ोतरी की गई है, इसके अलावा, निजी कारों के लिए FASTag वार्षिक पास की कीमत अब ₹3,075 कर दी गई है, जो साल भर में 200 टोल क्रॉसिंग की सुविधा प्रदान करता है।
यात्रा पर निकलने से पहले अपने FASTag का बैलेंस जरूर चेक कर लें और स्मार्टफोन में UPI ऐप को बैकअप के तौर पर तैयार रखें
















