
देश में बढ़ती आबादी को रोकने के लिए दशकों से चले आ रहे “हम दो, हमारे दो” के नारे के बीच, आंध्र प्रदेश सरकार ने एक क्रांतिकारी और चौंकाने वाला बदलाव किया है, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में भारत की पहली ‘जनसंख्या प्रबंधन’ (Population Management) नीति 2026 का मसौदा पेश किया है इस नीति के तहत अब राज्य में तीसरा बच्चा पैदा करने वाले परिवारों को नकद प्रोत्साहन और विशेष सुविधाएं दी जाएंगी।
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क्यों पड़ी इस नीति की जरूरत?
आंध्र प्रदेश की कुल प्रजनन दर (TFR) गिरकर 1.5 रह गई है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है, सरकार का मानना है कि यदि यही स्थिति रही, तो आने वाले दशकों में राज्य “बुजुर्गों के प्रदेश” में बदल जाएगा, इसी ‘जनसांख्यिकीय संकट’ (Demographic Crisis) से बचने के लिए मुख्यमंत्री नायडू ने प्रजनन दर को बढ़ाकर 2.1 करने का लक्ष्य रखा है।
पॉलिसी की मुख्य घोषणाएं: क्या मिलेगा लाभ?
सरकार ने ‘पोषण-शिक्षा-सुरक्षा’ पैकेज के तहत भारी-भरकम लाभों की घोषणा की है:
- दूसरे या तीसरे बच्चे के जन्म पर सरकार परिवार को ₹25,000 की एकमुश्त वित्तीय सहायता देगी।
- तीसरे बच्चे के पालन-पोषण के लिए अगले 5 वर्षों तक ₹1,000 प्रति माह सीधे बैंक खाते में भेजे जाएंगे।
- तीसरे बच्चे को 18 वर्ष की आयु तक पूरी तरह मुफ्त शिक्षा दी जाएगी।
- जो सरकारी कर्मचारी तीसरे बच्चे की योजना बनाएंगे, उन्हें 12 महीने का मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) और पिता को 2 महीने का पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) मिलेगा।
स्थानीय निकाय चुनाव में भी बदलाव
अब तक राज्य में दो से अधिक बच्चे होने पर चुनाव लड़ने पर पाबंदी थी, लेकिन नई नीति के तहत इस नियम को खत्म करने की तैयारी है, अब 2 से अधिक बच्चों वाले नागरिक भी पंचायत और नगर पालिका चुनाव लड़ सकेंगे।
कब से लागू होगी योजना?
यह ऐतिहासिक नीति 1 अप्रैल, 2026 से पूरे राज्य में लागू होने की संभावना है, सरकार का ध्यान न केवल आबादी बढ़ाने पर है, बल्कि महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाने के लिए ‘शी कैब्स’ और पिंक टॉयलेट्स जैसे बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करने पर है।
जहाँ एक तरफ पूरा देश जनसंख्या नियंत्रण की बात कर रहा है, वहीं आंध्र प्रदेश का यह मॉडल विकसित देशों (जैसे जापान और दक्षिण कोरिया) की तर्ज पर ‘यंग वर्कफोर्स’ को बचाने की एक अनूठी कोशिश है।
















