
देश में किरायेदारी को लेकर अक्सर होने वाले विवादों पर अब सरकार और न्यायपालिका ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है, यदि आप किराये पर रहते हैं और रेंट एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी कब्जा जमाए बैठे हैं, तो यह लापरवाही आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है ‘मॉडल टेनेंसी एक्ट’ (Model Tenancy Act) और सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने पर किरायेदारों को भारी जुर्माना और जेल तक की हवा खानी पड़ सकती है।
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नए कानून का हंटर: 2 महीने बाद लगेगा 4 गुना जुर्माना
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ‘मॉडल टेनेंसी एक्ट’ के तहत मकान मालिकों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। नए नियमों के मुताबिक:
- दोगुना किराया: यदि रेंट एग्रीमेंट खत्म होने या नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद भी किरायेदार कमरा खाली नहीं करता है, तो उसे शुरुआती दो महीनों के लिए दोगुना मासिक किराया देना होगा।
- चौगुना जुर्माना: अगर मामला दो महीने से ज्यादा खिंचता है, तो मकान मालिक को किरायेदार से 4 गुना किराया वसूलने का कानूनी हक होगा।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: ‘किरायेदार कभी मालिक नहीं हो सकता’
सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न मामलों की सुनवाई करते हुए साफ कर दिया है कि संपत्ति पर लंबे समय तक कब्जा रखने से किरायेदार को मालिकाना हक नहीं मिल जाता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:
- चाहे किरायेदार 10 साल से रह रहा हो या 50 साल से, वह संपत्ति का मालिक होने का दावा कभी नहीं कर सकता।
- अदालत के आदेश के बावजूद घर खाली न करने पर इसे ‘कोर्ट की अवमानना’ माना जाएगा, जिसके लिए जेल की सजा भी दी जा सकती है।
- मकान मालिक अब बाजार दर के हिसाब से ‘मेस्ने प्रॉफिट’ (कब्जे की अवधि का हर्जाना) वसूलने के हकदार हैं।
मकान मालिकों के लिए भी तय हुई सीमा
जहाँ कानून किरायेदारों पर सख्त है, वहीं मकान मालिकों पर भी लगाम कसी गई है, अब मकान मालिक आवासीय संपत्ति के लिए 2 महीने से ज्यादा की सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं ले सकते। साथ ही, बिना 3 महीने के नोटिस के किराये में मनमानी बढ़ोतरी नहीं की जा सकती।
विवाद सुलझाने के लिए अलग रेंट कोर्ट
अब मकान मालिकों और किरायेदारों को छोटे-छोटे विवादों के लिए सिविल कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने होंगे नए कानून के तहत हर राज्य में ‘रेंट अथॉरिटी’ और ‘रेंट कोर्ट’ बनाने का प्रस्ताव है, जो 60 दिनों के भीतर विवाद का निपटारा करेंगे।
साफ है कि अब रेंट एग्रीमेंट की शर्तों का पालन करना दोनों पक्षों के लिए अनिवार्य है, किसी भी विवाद से बचने के लिए रेंट एग्रीमेंट को कानूनी रूप से रजिस्टर्ड करवाना सबसे सुरक्षित रास्ता है।
















